जयपुर

विश्व शरणार्थी दिवस: राजस्थान में लाल फीताशाही की जकड में PAK विस्थापित, न घर के रहे- न घाट के

World Refugee Day: राजस्थान में लाल फीताशाही की जकड में PAK विस्थापित
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Jun 20, 2018
Pakistan Refugee in Rajasthan

सुरेश व्यास, जयपुर।

दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत भी शरणार्थियों की समस्या से जूझ रहा है। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दुओं के धार्मिक उत्पीड़न के चलते हजारों पाकिस्तानी हिन्दू हर साल शरण की उम्मीद में राजस्थान आ रहे हैं, लेकिन लालफीताशाही में जकड़े इन लोगों की उम्मीदें आज भी सपना ही बनी हुई है। ऐसे में कह सकते हैं कि ये शरणार्थी न घर के रहे न घाट के।

दरअसल, धर्म के नाम पर आए दिन हो रहे अत्याचारों से परेशान होकर अपनों के पास रहने की उम्मीद पाल कर हर साल राजस्थान आ रहे पाकिस्तानी हिन्दू परिवारों की हालत यहां भी दयनीय है। जबरन धर्म परिवर्तन, बहन बेटियों की इज्जत के साथ आए दिन हो रहे खिलवाड़ और नागरिक सुविधाओं के मामले में भी दोयम दर्जा पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू परिवारों की नियती बन चुका है। इससे दुखी होकर हजारों पाकिस्तानी हिन्दू अपना घर-बार और कारोबार छोड़कर भारत का रुख कर रहे हैं, लेकिन यहां आकर ये लोग लालफीताशाही के मक्कड़जाल में फंसते जा रहे हैं। कच्ची बस्तियों में झोपड़े बनाकर रहना और दो जून की रोटी के लिए पत्थर तोड़ना भी आसान नहीं है। जोधपुर में काली बेरी और डाली बाई मंदिर के पास सैकड़ों की संख्या में रह रहे पाकिस्तानी विस्थापितों की तस्वीरें इनकी परेशानी की कहानी खुद ब खुद बयां कर देती है। ये लोग वापस लौटना नहीं चाहते और यदि जबरन डिपोर्ट यानी वापस पाकिस्तान भेज दिया जाता है तो वहां जान के लाले तक पड़ जाते हैं।

पाकिस्तान के नेशनल कमीशन फॉर जस्टिस एंड पीस और पाकिस्तान ह्यूमन राइट कमीशन की रिपोर्ट भी दहलाने वाली है। दोनों संगठनों की रिपोर्ट न सिर्फ पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिन्दू आबादी पर धार्मिक उत्पीड़न की पुष्टि करती हैं, बल्कि दावा किया जाता है कि पिछले ढाई दशक में सवा लाख से ज्यादा पाकिस्तानी हिन्दू परिवारों ने पलायन कर भारत में शरण लेने की कोशिश की है। नागरिकता नहीं मिल पाने की स्थिति में कई बार इन्हें वापस पाकिस्तान भेज दिया जाता है।

एक अनुमान के मुताबिक पिछले 3 सालों में 1379 हिन्दू पाकिस्तानी विस्थापितों को भारत से डिपोर्ट किया गया और वहां पहुंचते ही इन लोगों की शामत आ गई। पिछले 25 मार्च को पाकिस्तान में 50 हिन्दू परिवारों के जबरन धर्म परिवर्तन की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थी और इनमें से अधिकांश लोग भारत से वापस पाकिस्तान लौटे थे।

हिन्दू परिवारों के पलायन का असर ही माना जाना चाहिए कि पाकिस्तान में हिन्दू आबादी लगातार घट रही है। पाकिस्तान में 1998 के बाद पिछले साल हुई जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि अब वहां हिन्दू आबादी घटकर महज 1.6 फीसदी रह गई है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में जहां हिन्दू आबादी सर्वाधिक है, वहां भी हिन्दू परिवारों की आबादी में कमी आई है। सिंध के थारपारकर व मिट्ठी जिलों में हिन्दू आबादी सर्वाधिक है और वहां से लगातार लोगों का पलायन जारी है।

पाकिस्तानी विस्थापितों के लिए बरसों से संघर्ष कर रहे सीमान्त लोक संगठन के मुखिया हिन्दूसिंह सोढ़ा कहते हैं कि धार्मिक उत्पीड़न के चलते पलायन पाकिस्तान के हिन्दू परिवारों का पलायन मजबूरी हो गया है।


राजस्थान के सरहदी बाड़मेर-जैसलमेर जिलों के अलावा जोधपुर, बीकानेर व श्रीगंगानगर के कुछ इलाकों में ऐसे सैकड़ों परिवार हैं, जो पाकिस्तान से भारत तो चले आए, लेकिन वापस पाकिस्तान नहीं लौटना चाहते। इन परिवारों के लिए इधर कुआं, उधर खायी वाली स्थिति है। हालांकि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिसम्बर 2016 में लम्बे समय से नागरिकता के अटके हुए आवेदनों को देखते हुए राजस्थान, गुजरात व हरियाणा के कुछ जिलों के कलक्टर्स को नागरिकता प्रदान करने के अधिकार सौंपे तो विस्थापितों के लिए कुछ उम्मीद बंधी, लेकिन इस उम्मीद पर लालफीताशाही पानी फेरती नजर आती है।

सरकारी अमले पर राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ के दिशा निर्देशों का भी असर नहीं हुआ और 10 माह से पेशियां ही पड़ रही है। नागरिकता के हजारों आवेदन फाइलों के ढेर में ही दबे पड़े हैं। जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर व प्रदेश के अन्य हिस्सों में रहकर विस्थापन झेल रहे हजारों पाकिस्तानी हिन्दू अल्पसंख्यकों को सरकार क्या, अदालत के निर्देशों पर भी समय पर भारत की नागरिकता नहीं मिल पा रही। नागरिकता तो दूर वापस पाकिस्तान नहीं लौटने की इच्छा जता चुके लगभग 20 हजार विस्थापितों के लोंग टर्म वीजा (एलटीवी) आवेदन भी सरकारी महकमों में धूल फांक रहे हैं। ऐसे में ये पाकिस्तानी विस्थापित तो एलटीवी के अभाव में नागरिकता के लिए आवेदन भी नहीं कर पा रहे।

FACT FILE: भयावह है उत्पीड़न की कहानी
- 6 दिसम्बर 1992 के बाद एक साथ तोड़े गए 120 मंदिर
- आजादी के वक्त पाक में थे 428 मंदिर, आज बचे सिर्फ 26
- कई स्वतंत्र संस्थाओं की रिपोर्ट्स खोल रही हैं पाकिस्तान की पोल
- पाकिस्तान के नेशनल कमीशन फॉर जस्टिस एंड पीस की रिपोर्ट में खुलासा
- 74 फीसदी हिन्दू महिलाएं यौन शोषण का शिकार
- पाक मानवाधिकार आयोग ने माना
- हर माह 20 से 25 हिन्दू लड़कियों का होता है अपहरण
- निकाह के नाम पर करवाया जाता है जबरन धर्म परिवर्तन
- पाकिस्तान में घट रही है हिन्दू आबादी
- मात्र 1.6 प्रतिशत हिन्दू रह गए हैं पाकिस्तान में
- सर्वाधिक हिन्दू परिवार पाक के सिंध प्रांत में
- पाक की राजनीति में भी घटा हिन्दू नेताओं का दबदबा

Updated on:
20 Jun 2018 10:17 am
Published on:
20 Jun 2018 10:16 am