
नईनाथ धाम : आस्था का अनूठा केंद्र
बस्सी/बांसखोह. जयपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर अरावली की प्राकृतिक वादियों में स्थित नईनाथ धाम सावन-भादवा के दो महीनों में शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र बन जाता है। इस दौरान यहां प्रतिदिन मेले जैसा माहौल रहता है और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन, जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। सावन-भादवा में प्रतिदिन, सोमवार और कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर विशेष आयोजन होते हैं। सावन कृष्ण चतुर्दशी और महाशिवरात्रि पर लक्खी मेले में लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। मंदिर परिसर दिनभर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहता है। शाम को मनोहारी झांकियों के साथ महाआरती होती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। सावन में कांवड़, पदयात्रा और कनक दंडवत करते हुए भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। नईनाथ धाम की करीब दो दर्जन धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं के लिए सवामणी और गोठ की सुविधा उपलब्ध है। धार्मिक आयोजनों के साथ श्रद्धालु लव-कुश वाटिका में प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद भी लेते हैं। हरियाली, अरावली की वादियां और आध्यात्मिक वातावरण नईनाथ धाम को आस्था, सेवा और प्रकृति का अनूठा संगम बनाते हैं।