ईआरसीपी (ERCP) के बाद यमुना जल बंटवारा विवाद भी सुलझ गया है। केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की पहल पर और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की मौजूदगी में शनिवार को दिल्ली में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए त्रिपक्षीय एमओयू हुआ।
जयपुर। ईआरसीपी (ERCP) के बाद यमुना जल बंटवारा विवाद भी सुलझ गया है। तीस साल से यमुना के पानी का इंतजार कर रहे राजस्थान के चुरू, सीकर, झुंझुनूं सहित अन्य जिलों को अब 577 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिल सकेगा। वहीं, हरियाणा के भिवानी और हिसार जिलों को भी पानी मिलेगा।
केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की पहल पर और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर की मौजूदगी में शनिवार को दिल्ली में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए त्रिपक्षीय एमओयू हुआ। जलशक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी, राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन अभय कुमार और हरियाणा के जल संसाधन विभाग के आयुक्त पंकज अग्रवाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
समझौता के तहत राजस्थान को हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज (ताजेवाले हैंड) से पानी मिलेगा। इसके लिए करीब 250 किलोमीटर लम्बी तीन अलग-अलग पाइपलाइन बिछाई जाएगी। कुछ दिन पहले ही राजस्थान और हरियाणा के जल संसाधन विभाग और केन्द्रीय जल आयोग के बीच मंथन हुआ था। अपर यमुना बेसिन में तीन जल भंडारण रेणुकली, लखवार और किशाऊ चिह्नित किए गए हैं, जहां से राजस्थान को हथिनीकुंड से निर्धारित अवधि के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा। पानी जुलाई से अक्टूबर के बीच उपलब्ध होगा।
प्रतिक्रिया :-
भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री राजस्थान, "राजस्थान के लिए जिस पर पूर्ववती काँग्रेस सरकार नहीं दिया। केन्दीय जलशक्ति मंत्री और हरियाणा के सीएम ने हमारी जरूरतों को समझा और डीपीआर बनाने की सहमति पर हस्ताक्षर किए गए। इससे चुरू, सीकर और झुंझनू तीनों जिलों में पानी की दिक्कत दूरी होगी।"
मील का पत्थर साबित होगा
गजेन्द्र सिंह शेखावत, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री, "प्रधानमंत्री नरेंद मोदी के मार्गदर्शन में बनी यह सहमति ऐतिहासिक है। निश्चित ही राजस्थान में जल उपलब्धता को लेकर यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्री के आपसी सहयोग से भी यह संभव हुआ है।"
ईआरसीपी (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) परियोजना पर राजस्थान, मध्यप्रदेश और केन्द्र सरकार के बीच 28 जनवरी को दिल्ली में एमओयू हुआ। इसकी डीपीआर बनाने का काम अंतिम चरण में है। इससे 21 जिलों में पानी पहुंच सकेगा। इसके 19 दिन बाद ही दिल्ली में ही यमुना जल बंटवारा विवाद का भी पटाक्षेप हो गया।
समझौता और पानी...
■ कब हुआ अनुबंध
12 मई, 1994 को यमुना के पानी बंटवारे को लेकर एमओयू हुआ, जिसमें राजस्थान को ताजेवाला हैड से पानी देना तय किया गया। पांच राज्यों के (हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी व दिल्ली) मुख्यमंत्रियों के बीच समझौता हुआ।
■ हमारा हिस्सा
राजस्थान को ताजेवाले हैड से 1917 क्युसेक व ओखला हैड से 1281 क्युसेक पानी दिया जाना तय हुआ था। अभी ओखला हैड के मामले में काम होना है।
■ संशोधित प्लान
पेयजल और सिंचाई के लिए पानी फेजवाइज लान प्रस्तावित है। पिछले साल पहले चरण के लिए 14204.81 करोड़ और दूसरे फेज में 17162.04 करोड़ रुपए लागत आंकी गई। भूमिगत पेयजल लाइन डाली जाएगी।
■ इस तरह होगा फायदा
सीकर और झुंझुनू जिले की पेयजल आवश्यकता पूरी हो सकेगी। चूरू और झुंझुनू जिले में करीब 105000 हैक्टेयर जमीन में सिंचाई हो सकेगी।
(पानी मात्रा और लागत में बदलाव संभव है, क्योंकि यह आकलन पूर्ववर्ती सरकार के समय का है। डीपीआर बनने के बाद स्थिति साफ होगी)
राजस्थान लगातार पानी के लिए जूझता रहा है। राज्य के 33 जिलों में से 27 जिले डार्क जोन में हैं। ऐसे में पीकेसी-ईआरसीपी और यमुना जल परियोजना दोनों ही प्रदेश के लिए संजीवनी साबित
होंगे। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में राजस्थान में पानी लाने के लिए दावे और वादे किए थे। पूर्ववर्ती कांग्रेस के समय भाजपा इसी मुद्दे पर शेखावटी व अन्य जिलों में प्रदर्शन भी कर चुकी है।