
आज का युवा फिट दिखना चाहता है। सोशल मीडिया पर एब्स, बाइसेप्स और परफेक्ट बॉडी की तस्वीरें देखकर वह जिम की ओर दौड़ रहा है। फिटनेस अच्छी बात है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल मजबूत शरीर ही सफल जीवन की गारंटी है? क्या अच्छी फिजिक होने से तनाव, चिंता, अवसाद और विफलता का डर खत्म हो जाता है? सच्चाई यह है कि आज की पीढ़ी अपनी सबसे बड़ी विरासत योग को धीरे-धीरे भूलती जा रही है। वह शरीर को तराशने में लगी है, लेकिन मन को मजबूत बनाने की कला से दूर होती जा रही है। जबकि जीवन की सबसे बड़ी लड़ाइयां मांसपेशियों से नहीं, बल्कि मानसिक शक्ति से जीती जाती हैं।
आज का युवा हर समय किसी न किसी दबाव में है। कॅरियर का तनाव, रिलेशनशिप की उलझनें, सोशल मीडिया पर तुलना, नौकरी की चिंता और भविष्य का डर। बाहर से मुस्कुराते हुए दिखने वाले कई युवा भीतर से टूट रहे हैं। यही कारण है कि मानसिक स्वास्थ्य आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हो चुका है। ऐसे समय में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने का विज्ञान बनकर सामने आता है। आज के समय में योग मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और चारित्रिक अवसाद से बचाता है।
भगवद् गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि 'योग: कर्मसु कौशलम्।' अर्थात योग जीवन के प्रत्येक कार्य को श्रेष्ठ ढंग से करने की कला है। योग केवल आसन नहीं है, बल्कि सोचने, जीने और चुनौतियों का सामना करने की सही पद्धति है। योग को छोडक़र जिम की ओर भागने वालों को समझना चाहिए कि वहां केवल शरीर मजबूत होता है, लेकिन योग शरीर के साथ मन और आत्मा को भी सशक्त बनाता है। जिम में आप कैलोरी बर्न करते हैं, जबकि योग तनाव और नकारात्मकता को बर्न करता है। आज कई युवा घंटों जिम में बिताते हैं लेकिन पांच मिनट भी ध्यान या प्राणायाम के लिए नहीं निकालते। परिणाम यह है कि शरीर तो फिट दिखता है, लेकिन मन बेचैन रहता है।
महर्षि पतंजलि ने योग को परिभाषित करते हुए कहा कि 'योगश्चित्तवृत्ति निरोध:' अर्थात मन की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित करना ही योग है। आज जब मोबाइल स्क्रीन हमारे मन को हर सेकंड विचलित कर रही है, तब यह सूत्र पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। दुर्भाग्य से आज योग का प्रचार तो बहुत हुआ है, लेकिन उसकी गुणात्मकता में कमी भी आई है। योग को केवल आसनों तक सीमित कर दिया गया है। अनेक स्थानों पर योग की मूल क्रियाओं के स्थान पर अन्य गतिविधियों को जोड़ दिया गया है। प्राचीन योग परंपरा में वर्णित षट्कर्म आज लगभग लुप्त होते जा रहे हैं, जबकि उनके स्वास्थ्य संबंधी अनेक लाभ थे। इसी प्रकार प्राचीन ग्रंथ घेरंड संहिता में 32 प्रमुख आसनों का उल्लेख मिलता है, लेकिन आज उनका समुचित अभ्यास बहुत कम देखने को मिलता है। विशेष रूप से सिद्धासन जैसे महत्वपूर्ण आसनों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जबकि योग साधना में उनका अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।
विश्व स्तर पर भी कई राजनेता और कॉर्पोरेट लीडर ध्यान और योग को अपनी सफलता का आधार मानते हैं। क्योंकि नेतृत्व केवल शारीरिक ऊर्जा से नहीं, बल्कि मानसिक स्पष्टता और संतुलन से विकसित होता है। आज के युवाओं के पसंदीदा कई सितारे योग को अपनी सफलता का रहस्य मानते हैं। शिल्पा शेट्टी वर्षों से योग का प्रचार कर रही हैं। उनका मानना है कि योग ने उन्हें फिटनेस के साथ मानसिक संतुलन भी दिया। मलाइका अरोड़ा की फिटनेस और लचीलापन योग की देन है। करीना कपूर खान ने मातृत्व के दौरान और उसके बाद योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभिनेत्री जेनिफर एनिस्टन और कई हॉलीवुड सितारे भी योग को तनावमुक्त जीवन का आधार मानते हैं। इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि योग केवल साधु-संतों के लिए नहीं, बल्कि आधुनिक जीवन में सफलता पाने वालों के लिए भी उतना ही आवश्यक है।
योग आपको वहां पहुंचा सकता है जहां केवल ताकत नहीं पहुंचा सकती है. स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि 'एकाग्रता ही ज्ञान का रहस्य है।' योग व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ाता है। जब मन शांत होता है तो निर्णय बेहतर होते हैं, लक्ष्य स्पष्ट दिखते हैं और सफलता की संभावना बढ़ जाती है। खिलाड़ी, वैज्ञानिक, कलाकार और उद्यमी हर क्षेत्र के सफल लोग मानसिक स्पष्टता को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानते हैं। योग यही स्पष्टता देता है। गीता का एक और महत्वपूर्ण श्लोक है-
'समत्वं योग उच्यते।' अर्थात सुख-दु:ख, लाभ-हानि और सफलता-विफलता में संतुलित बने रहना ही योग है। आज की युवा पीढ़ी के लिए इससे बड़ा जीवन मंत्र शायद कोई नहीं हो सकता।
आज पूरी दुनिया माइंडफुलनेस, मेडिटेशन और वेलनेस इंडस्ट्री पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है। जिस ज्ञान को दुनिया नई खोज समझ रही है, वह भारत हजारों वर्षों से जानता है। योग केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व, अनुशासन और सकारात्मक सोच का भी आधार है। यह भारत की सबसे बड़ी सॉफ्ट पावर बन चुका है। अगर आप रोज जिम जाते हैं तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन अपने दिन के 20 से 30 मिनट योग, प्राणायाम और ध्यान को भी दें। आपकी बॉडी मजबूत होगी, साथ ही आपका दिमाग भी सुपरफास्ट और तनावमुक्त बनेगा।
याद रखिए, दुनिया आपको आपके शरीर से पहले आपकी सोच और व्यक्तित्व से पहचानती है। इस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर संकल्प लें कि 'सिर्फ फिट नहीं, मानसिक रूप से भी हिट बनना है।' क्योंकि सिक्स पैक एब्स आपको कुछ समय के लिए आकर्षक बना सकते हैं, लेकिन योग आपको जीवनभर प्रभावशाली, संतुलित और सफल बना सकता है। भारत की यह प्राचीन धरोहर आज भी युवाओं के लिए उतनी ही प्रासंगिक है जितनी हजारों वर्ष पहले थी। जरूरत केवल इसे समझने और अपनाने की है। यही योग का संदेश है, यही स्वस्थ और सफल भारत का मार्ग है।
आर.के. चौधरी, वरिष्ठ योगाचार्य, नई दिल्ली