प्रदेशभर में शुक्रवार को विश्व योगा दिवस मनाया गया।
जयपुर। प्रदेशभर में शुक्रवार को विश्व योगा दिवस मनाया गया। झोटवाड़ा स्थित मंगलम सीटी में अमुधा योगा में सैकड़ों लोगों ने योगाभ्यास किया। इस दौरान लोगों को योगासन, ध्यान आदि कराया गया। इस दौरान वृक्षारोपण भी किया गया।
योग शिक्षक रामभजो ने बताया कि महर्षि पतंजलि ने योग को आठ भागों (नियमों) में बांटा है जिसे अष्टांग योग कहते हैं। योग को लेकर कई परिभाषाएं मौजूद हैं। जिनमें से दो प्रमुख हैं। पहली परिभाषा के अनुसार गीता में लिखा है 'योग: कर्मसु कौशलम्' अर्थात् फल की इच्छा के बिना कर्म की कुशलता ही योग है। महर्षि के अनुसार ‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोध:’ यानी मन की इच्छाओं को संतुलित बनाना योग कहलाता है। महर्षि पतंजलि ने योग को आठ भागों (नियमों) में बांटा है। जिसे अष्टांग योग कहते हैं।
जानिए..अष्टांग योग के बारे में..
यम : इसमें सत्य व अहिंसा का पालन करना, चोरी न करना, ब्रह्मचर्या का पालन व ज्यादा चीजों को इक्कठा करने से बचना शामिल है।
नियम : ईश्वर की उपासना, स्वाध्याय, तप, संतोष और शौच महत्वपूर्ण माने गए हैं।
आसन : स्थिर की अवस्था में बैठकर सुख की अनुभूति करने को आसन कहते हैं।
प्राणायाम : सांस की गति को धीरे-धीरे वश में करना प्राणायाम कहलाता है।
प्रत्याहार : इन्द्रियों को बाहरी विषयों से हटाकर आंतरिक विषयों में लगाने को प्रत्याहार कहते हैं।
धारणा : संसार की हर वस्तु को समान समझना धारणा कहलाता है।
ध्यान : मन की एकाग्रता।
समाधि : इस दौरान न व्यक्तिदेखता है, न सूंघता है, न सुनता है व न स्पर्श करता है।
योग के कई है लाभ ..
योग शिक्षक रामभजो ने बताया कि योग से मस्तिष्क शांत होता है। जिससे तनाव कम होकर ब्लड प्रेशर, मोटापा और कोलेेस्ट्रॉल में कमी आती है। मांसपेशियां मजबूत होती हैं। नर्वस सिस्टम में सुधार होता है। शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत में इजाफा होता है। जिससे आप बार-बार बीमार नहीं पड़ते। योग से कई तरह के लाभ होते है।