मरुधरा की पावन धरा पोकरण में इस बार हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रेल को मनाया जाएगा। रामभक्त हनुमान के प्रिय रोटे के महाप्रसाद को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है।
मरुधरा की पावन धरा पोकरण में इस बार हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रेल को मनाया जाएगा। रामभक्त हनुमान के प्रिय रोटे के महाप्रसाद को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। कस्बे के ऐतिहासिक सालमसागरधीश हनुमान मंदिर और बांकना हनुमान मंदिर में इस वर्ष 351-351 किलो के विशालकाय रोट तैयार किए जाएंगे। जिनसे करीब 1000 किलो यानि 10 क्विंटल चूरमे का महाप्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।
महाप्रसाद की सबसे बड़ी विशेषता इसे पकाने की पारंपरिक तकनीक है। रोटा विशेषज्ञ जगदीश जोशी और उनकी टीम के अनुसार इतने विशाल रोट को पकाना किसी चुनौती से कम नहीं है। पहले आटे को शुद्ध दूध में गूंथकर एक विशाल परात में रोटे का आकार दिया जाता है। इसे सूतीकपड़े और जूट के बारदानों से इस तरह लपेटा जाता है कि भाप का एक अंश भी बाहर न निकल सके। गोबर की थेपडिय़ों (उपलों) के विशाल ढेर के बीच इस रोटे को दबा दिया जाता है। यदि रोटा 200 किलो से अधिक है तो उसे पूरे 48 घंटे तक अंगारों के बीच पकने के लिए छोड़ दिया जाता है।
रामभक्त हनुमान को भोग लगने वाला यह चूरमा शुद्धता और स्वाद का बेजोड़ नमूना होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि 100 किलो आटे का रोटा है तो उसमें 75 किलो दूध का उपयोग गूंथने में होता है। पकने के बाद इसमें 50 किलो शुद्ध देशी घी, 40 किलो शक्कर, 20 किलो सूखे मेवे मिश्रित किए जाते है, जिससे करीब 300 किलो चूरमा बनता है। इसी अनुपात में इस बार 351 किलो के रोट से 10-10 क्विंटल का महाप्रसाद इन दो मंदिरों में बनेगा।
जन्मोत्सव को लेकर बांकना हनुमान मंदिर सहित अन्य मंदिरों में रंग-रोगन और साफ-सफाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। श्रद्धालुओं में भी रोट तैयार करने की विधि देखने और महाप्रसाद का लाभ लेने को लेकर उत्साह नजर आ रहा है। कपड़े और जूट की इस प्राचीन तकनीक से बना यह रोटा न केवल पोकरण, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी श्रद्धा व आस्था से जुड़ा हुआ है।