जैसलमेर

Jaisalmer: 50 हजार से 2 लाख… इलाके बदलते ही बदलता कब्जे का पूरा गणित

जैसलमेर में सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जे का खेल सुनियोजित नेटवर्क के जरिए संचालित होने के संकेत मिले हैं। पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि जमीन की पहचान से लेकर कब्जा टिकाने तक हर चरण के लिए 50 हजार से 2 लाख रुपए तक की रकम तय की जाती है। शहर से सटे बाहरी क्षेत्र, नई कॉलोनियां और प्रस्तावित विकास क्षेत्र इस काले कारोबार के सबसे बड़े निशाने बने हुए हैं।
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Jul 09, 2026
jaisalmer news
जैसलमेर. शहर से सटे सरकारी भूखंड पर अतिक्रमण का दृश्य।

जैसलमेर. शहर और आसपास के इलाकों में सक्रिय स्थानीय नेटवर्क सार्वजनिक भूमि की पहचान से लेकर कब्जा टिकाने तक अलग-अलग चरणों में रकम तय करते हैं। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि शहरी इलाके, जमीन की संभावित कीमत, सडक़ से दूरी, भविष्य के विकास और प्रशासनिक निगरानी के आधार पर यह रकम सामान्यत: 50 हजार से 2 लाख रुपए तक पहुंच जाती है। जांच और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारियां बताती हैं कि शहर की सीमा से सटे बाहरी क्षेत्रों, नई कॉलोनियों के आसपास और प्रस्तावित विकास क्षेत्रों में सरकारी जमीन सबसे अधिक निशाने पर रहती है। पहले जमीन चिन्हित होती है, फिर कब्जाधारी तैयार किए जाते हैं और बाद में उस पर निर्माण या सीमांकन कर स्थायी स्वरूप देने की कोशिश होती है।

यूं समझिए कब्जे का पूरा गणित

कब्जे का अनौपचारिक नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से काम करता है। हर चरण का अलग मूल्य तय रहता है। इस प्रक्रिया में रकम लगातार बढ़ती जाती है। शुरुआती कब्जा अपेक्षाकृत कम राशि में होता है, जबकि सडक़ किनारे या भविष्य में व्यावसायिक संभावना वाली जमीन पर कीमत कई गुना बढ़ जाती है।

यूं चलता है अतिक्रमण का खेल

-सरकारी जमीन की पहचान

-संभावित कब्जाधारी तलाशना

-रातोंरात सीमांकन या निर्माण

-विरोध होने पर सामूहिक दबाव बनाना

-बाद में खरीद-बिक्री का माहौल तैयार करना

इलाके बदलते ही बदल जाता है रेट

नगरपरिषद के सूत्र बताते हैं कि शहर से दूरी, सडक़ संपर्क और भविष्य की विकास योजनाएं कब्जे की कीमत तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं।

दूरस्थ सरकारी भूमि- 50 से 75 हजार रुपए

-शहर से सटे बाहरी क्षेत्र- 75 हजार से 1.25 लाख रुपए

-संभावित व्यावसायिक क्षेत्र: 1.25 लाख से 2 लाख रुपए

नोट: यह आंकड़े स्थानीय स्तर पर सामने आए इनपुट और पड़ताल पर आधारित अनुमान हैं।

सबसे अधिक निशाने पर कौन-सी जमीन

-राजस्व विभाग की खाली भूमि

-सडक़ किनारे सरकारी भूमि

-प्रस्तावित आवासीय विस्तार क्षेत्र

-विकास योजनाओं के आसपास खाली भूखंड

हकीकत यह भी

-जैसलमेर का शहरी दायरा लगातार बढ़ रहा है।

-नई कॉलोनियों और सडक़ परियोजनाओं से जमीन का बाजार मूल्य तेजी से बढ़ा।

-जमीन महंगी होने के साथ सरकारी भूमि पर दबाव भी बढ़ा।

-अतिक्रमण हटाने के अभियान लगातार चल रहे हैं, फिर भी नए कब्जे सामने आ रहे हैं।

-एक कब्जा हटने के बाद दूसरे क्षेत्र में नया कब्जा होने का क्रम चुनौती बना हुआ है।

एक्सपर्ट व्यू: खाली सरकारी जमीन की नियमित निगरानी

अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं होगा। सरकारी भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड, जीआइएस मैपिंग, ड्रोन सर्वे, रियल टाइम मॉनिटरिंग और तेज कानूनी कार्रवाई ही इस समानांतर रेट बाजार को रोक सकती है। जब तक खाली सरकारी जमीन की नियमित निगरानी नहीं होगी, तब तक नए कब्जों की संभावना बनी रहेगी।

-अरविंद गोपा, अधिवक्ता

Updated on:
09 Jul 2026 09:01 pm
Published on:
09 Jul 2026 09:00 pm