जैसलमेर

पूर्णिमा की धवल चांदनी में दिखाई दिए 64 गोडावण

वैशाख मास की पूर्णिमा के अवसर पर डीएनपी की ओर से सूरज की रोशनी के साथ पूर्णिमा की धवल चांदनी में दो साल बाद करवाई गई वन्यजीवों की गणना ेमें दुर्लभ राज्यपक्षी 64 गोडावण नजर आने से वन विभाग के कार्मिकों के साथ वन्यजीव प्रेमियों में खुशी का माहौल है। गत वर्ष वैशाख पूर्णिमा के आसपास से लेकर जून के महीने में भी पश्चिमी विक्षोभ के चलते लगातार बारिशें आने की वजह से वन्यजीवों की गणना नहीं करवाई जा सकी थी।

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May 24, 2024

वैशाख मास की पूर्णिमा के अवसर पर डीएनपी की ओर से सूरज की रोशनी के साथ पूर्णिमा की धवल चांदनी में दो साल बाद करवाई गई वन्यजीवों की गणना ेमें दुर्लभ राज्यपक्षी 64 गोडावण नजर आने से वन विभाग के कार्मिकों के साथ वन्यजीव प्रेमियों में खुशी का माहौल है। गत वर्ष वैशाख पूर्णिमा के आसपास से लेकर जून के महीने में भी पश्चिमी विक्षोभ के चलते लगातार बारिशें आने की वजह से वन्यजीवों की गणना नहीं करवाई जा सकी थी। इस बार रिकॉर्ड गर्मी के चालू दौर में कुल 44 वाटर पॉइंट्स पर की गई वन्यजीवों की गणना के दौरान अच्छी तादाद में गोडावण के साथ अन्य पशु-पक्षी अपनी प्यास बुझाने वहां पहुंचे। जिले के जैसलमेर क्षेत्र में सुदासरी, गजई माता, जामड़ा चौहानी, सिपला और बरना आदि में 43 और पोकरण क्षेत्र के रामदेवरा इलाके में 21 गोडावण देखे गए हैं। जबकि दो साल पहले करवाई गई गणना में 42 गोडावण नजर आए थे। गौरतलब है कि विभाग की तरफ से वन्यजीवों की गणना वन क्षेत्रों में बने प्राकृतिक और कृत्रिम जलस्रोतों पर की जाती है। जब वन्यजीव वहां पानी पीने के लिए पहुंचते हैं। राष्ट्रीय मरु उद्यान जैसलमेर के उप वन संरक्षक डॉ. आशीष व्यास ने बताया कि इस गणना में गोडावण के साथ ही जंगली बिल्ली, चिंकारा, लोमड़ी आदि वन्यजीव नजर आए। इनमें 1000 से ज्यादा चिंकारा, 30 से ज्यादा मरु बिल्ली, 150 से ज्यादा लोमड़ी और मरु लोमड़ी और 100 से अधिक गिद्ध और शिकारी पक्षी गिने गए हैं। व्यास ने बताया कि अभी तक अंतिम आंकड़े प्राप्त नहीं हुए हैं। शनिवार तक सभी वाटर हॉल से जानकारी मिल जाएगी।

हलक तर करने पहुंचे वन्यजीव

डीएनपी क्षेत्र में गत 23 तारीख सुबह 8 से 24 मई 8 बजे तक 24 घंटों तक की गई गणना के दौरान पूर्णिमा पर चांद की धवल रोशनी में वन्यजीवों की चहलकदमी दिखी और दिन व रात को उनकी आवक के आधार पर उनकी गणना की गई। डीएनपी की तरफ से चिन्हित प्राकृतिक और कृत्रिम वाटर हॉल पर पहुंचकर वन्यजीवों ने अपने हलक तर किए। इस गणना को 84 विभागीय कार्मिक, होमगार्ड व स्थानीय लोगों ने पूरा किया। उन्होंने जमीन व पेड़ों पर झोपड़े व बनाए गए मचान में बैठकर वन्यजीवों की गिनती की। जानकारी के अनुसार दिन के अलावा जैसे-जैसे रात गहराती गई वन्यजीव पानी पीने संबंधित क्षेत्रों में वहां पहुंचते रहे।

अच्छे परिणाम मिले

प्रतिवर्ष की भांति वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर दिन व रात लगातार 24 घंटों के दौरान वॉटर हॉल पर की गई वन्यजीव गणना के अच्छे परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। इस बार पूरे क्षेत्र में भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में गोडावण सहित वन्यजीवों की अच्छी खासी तादाद प्यास बुझाने के लिए आए। गोडावण की संख्या में बढ़ोतरी बहुत खुशी की बात है।

  • आशीष व्यास, डीएफओ, डीएनपी, जैसलमेर
Published on:
24 May 2024 11:16 pm
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