जैसलमेर

Jaisalmer: 80 साल में बदली सीमा सुरक्षा, अब जवान के साथ तकनीक भी पहरेदार

जैसलमेर. आजादी के आठ दशक में भारत-पाक सीमा की सुरक्षा का स्वरूप भी तेजी से बदला है। फेंसिंग, चौकियों और जवानों के साथ अब सड़क, रोशनी, निगरानी, सूचना तंत्र और तकनीकी समाधान सीमा सुरक्षा की नई ताकत बन चुके हैं। 3323 किलोमीटर लंबी सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र का बड़ा निवेश इस बदलाव की तस्वीर दिखाता है।
2 min read
Aug 14, 2026
jaisalmer
जवान के साथ तकनीक भी पहरेदार

जैसलमेर. स्वतंत्रता दिवस पर आजादी के आठ दशक के सफर के साथ सीमा सुरक्षा के बदलते स्वरूप को भी देखा जा सकता है। भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा अब केवल फेंसिंग, चौकियों और जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं है। इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी समाधान, निगरानी, सूचना और त्वरित प्रतिक्रिया मिलकर सीमा प्रबंधन की बहुस्तरीय व्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार भारत-पाकिस्तान सीमा की लंबाई 3323 किलोमीटर है। यह गुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से गुजरती है। केंद्र सरकार ने 2021-22 से 2025-26 अवधि के लिए बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मैनेजमेंट योजना की स्वीकृत लागत 13020 करोड़ रुपए रखी है। योजना का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा और सीमा संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। इसका मतलब यह है कि सीमा सुरक्षा में निवेश केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं है। जवानों तक पहुंच बनाने वाली सडक़, रात में निगरानी के लिए रोशनी, बॉर्डर आउट पोस्ट और जरूरत के अनुसार तकनीकी समाधान भी इसी सुरक्षा ढांचे का हिस्सा हैं।

फेंसिंग से आगे बढ़ा सुरक्षा मॉडल

सीमा सुरक्षा को केवल तारबंदी के नजरिए से देखना अब पर्याप्त नहीं है। फेंसिंग भौतिक अवरोध तैयार करती है, बॉर्डर रोड सुरक्षा बलों की पहुंच और परिचालन क्षमता मजबूत करते हैं, जबकि फ्लडलाइट रात में निगरानी का महत्वपूर्ण आधार है। बॉर्डर आउट पोस्ट सीमा पर सुरक्षा बलों की तैनाती और संचालन के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं। गृह मंत्रालय की बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मैनेजमेंट योजना में बॉर्डर फेंस, बॉर्डर रोड, फ्लडलाइट, बॉर्डर आउट पोस्ट, हेलिपैड और फुट ट्रैक शामिल हैं। जहां भौतिक फेंसिंग संभव नहीं है, वहां तकनीकी समाधान लगाने का भी प्रावधान है।

सुरक्षा की बदलती परतें

फेंसिंग — भौतिक अवरोध

सडक़ — तेज पहुंच

फ्लडलाइट — रात में निगरानी

बॉर्डर आउट पोस्ट — तैनाती और संचालन का आधार

तकनीकी समाधान — निगरानी और सूचना क्षमता

सीआइबीएमएस में इंसान और तकनीक के एकीकरण की अवधारणा

कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम यानी सीआईबीएमएस आधुनिक सीमा प्रबंधन की तकनीकी अवधारणा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गृह मंत्रालय के अनुसार इसे भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर सिचुएशनल अवेयरनेस बेहतर करने तथा उभरती परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया में मदद के लिए अवधारित किया गया है। सीआइबीएमएस में मैनपावर, सेंसर, नेटवर्क, इंटेलिजेंस और कमांड-कंट्रोल समाधान के एकीकरण की अवधारणा है। सरकारी दस्तावेजों में सीआईबीएमएस से जुड़े तकनीकी समाधानों में सेंसर, कैमरे, रडार और कमांड-कंट्रोल प्रणालियों का उल्लेख मिलता है। इन्हें जैसलमेर सीमा पर वर्तमान तैनाती का दावा नहीं माना जा सकता।

सीमा प्रबंधन का फोकस केवल भौतिक निगरानी से आगे बढकऱ सूचना की जल्द पहचान, स्थिति का आकलन और तेज प्रतिक्रिया तक पहुंचता है।

बेहतर समन्वय से प्रभावी बन रहा सुरक्षा तंत्र

सीमा सुरक्षा के सूत्रों के अनुसार विशाल और कठिन भूभाग में सुरक्षा की प्रभावशीलता केवल जवानों की संख्या से तय नहीं होती। सडक़ और बॉर्डर आउट पोस्ट पहुंच मजबूत करते हैं, जबकि तकनीकी समाधान निगरानी और सूचना जुटाने की क्षमता बढ़ाते हैं। दोनों के बीच बेहतर समन्वय सुरक्षा तंत्र को अधिक प्रभावी बना सकता है।

Updated on:
14 Aug 2026 09:07 pm
Published on:
14 Aug 2026 09:07 pm