
jaisalmer nagar parishad
जैसलमेर. प्रदेश की राजधानी जयपुर में गुरुवार को स्थानीय निकाय मुखिया और जिला प्रमुख पदों के लिए निकाली गई लॉटरी से जैसलमेर नगरपरिषद सभापति का पद जहां लगातार दूसरी बार अनारक्षित हो गया है, यानी सबके लिए मुकाबला खुला है वहीं जिला प्रमुख पद पहली बार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित किया गया है। इससे सीमावर्ती जैसलमेर के शहरी व ग्रामीण हलकों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद नगरपरिषद सभापति और जिला प्रमुख पद को लेकर सियासी समीकरण बनना बदलना शुरू हो गए हैं। दोनों प्रमुख पदों को लेकर सत्ताधारी भाजपा व विपक्षी कांग्रेस में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जैसलमेर नगरपरिषद सभापति पद के अनारक्षित होने से अब किसी भी वर्ग के पात्र प्रत्याशी के लिए मैदान खुला रहेगा। ऐसे में सभी वर्गों के दावेदारों के लिए राजनीतिक संभावनाएं फिर से बन गई हैं। शहर की राजनीति में सक्रिय नेताओं और उनके समर्थकों ने भी संभावित प्रत्याशियों को लेकर जोड़-तोड़ और समीकरणों पर चर्चा शुरू कर दी है।
नगरपरिषद सभापति का पद अनारक्षित होने का असर शहर की वार्ड राजनीति पर भी पडऩा तय माना जा रहा है। लंबे समय से सभापति पद के लिए तैयारी कर रहे संभावित दावेदार अब अपने-अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटेंगे। वार्ड स्तर पर समर्थकों से संपर्क, सामाजिक समीकरणों की गणना और पार्टी संगठन में सक्रियता बढऩे की संभावना है। सोशल मीडिया के प्लेटफार्मों से लेकर धरातल तक उनके दावे नजर आने लगे हैं। राजनीतिक दलों के सामने भी अब सबसे बड़ी चुनौती ऐसे चेहरे के चयन की होगी, जो अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समूहों के बीच स्वीकार्य हो। सभापति पद के लिए टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं की सक्रियता आने वाले दिनों में बढऩी तय है। नगरपरिषद की राजनीति में कई पुराने समीकरण फिर से चर्चा में आ गए हैं।
दूसरी ओर जिला प्रमुख पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए पहली बार आरक्षित होने से जिले की ग्रामीण राजनीति में नई तस्वीर सामने आई है। अब जिला परिषद चुनाव में एसटी वर्ग से आने वाले संभावित दावेदारों के लिए जिला प्रमुख बनने का रास्ता खुल गया है। दूसरी ओर अंदरखाने इस पद को हासिल करने की राजनीति में जुटे कई नेताओं व उनके समर्थकों के अरमानों पर जरूर पानी फिर गया है। दोनों दलों को अब नए सिरे से एसटी वर्ग के प्रभावी चेहरों की तलाश और चुनावी रणनीति पर काम शुरू करना होगा। गौरतलब है कि जिला प्रमुख जिले की पंचायतीराज व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पद है। ऐसे में आरक्षण की घोषणा के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय नेताओं की नजर अब जिला परिषद की सीटों और उनके आरक्षण पर भी रहेगी। जिला प्रमुख पद के लिए किस क्षेत्र से कौन सा चेहरा मजबूत दावेदार बनकर सामने आता है, यह आने वाले चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभाएगा।
सभापति पद के अनारक्षित होने और जिला प्रमुख पद एसटी के लिए आरक्षित किए जाने के बाद अब सबकी निगाहें आगामी 17 तारीख को शहर व पंचायतीराज क्षेत्रों में वार्डों की लॉटरी पर टिक गई हैं। नगरपरिषद और जिला परिषद की वार्डवार आरक्षण सूची आने के बाद राजनीतिक दलों की ओर से आगामी रणनीति पर काम किया जाएगा। वार्डों के आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद सभापति और जिला प्रमुख पद के लिए संभावित चेहरों की स्थिति भी काफी हद तक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आरक्षण की घोषणा ने जैसलमेर की स्थानीय राजनीति में नई चुनावी हलचल पैदा कर दी है।
- 45 वार्ड जैसलमेर नगरपरिषद में
- 21 वार्ड जिला परिषद में
- 10 पंचायत समितियां जैसलमेर जिले में
- 268 ग्राम पंचायतें जिले में
Updated on:
13 Aug 2026 08:57 pm
Published on:
13 Aug 2026 08:57 pm
