स्वर्णनगरी की कलात्मक सुंदरता, प्राकृतिक वातावरण और समृद्ध लोक संस्कृति देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह भी है कि कई गुना दाम वसूलने, सुविधा के नाम पर ठगी और धोखाधड़ी की घटनाओं ने सैलानियों को आहत भी किया है।
स्वर्णनगरी की कलात्मक सुंदरता, प्राकृतिक वातावरण और समृद्ध लोक संस्कृति देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह भी है कि कई गुना दाम वसूलने, सुविधा के नाम पर ठगी और धोखाधड़ी की घटनाओं ने सैलानियों को आहत भी किया है। राजस्थान पत्रिका से परिचर्चा में सैलानियों ने जहां जैसलमेर की सराहना की, वहीं यहां पर्यटन में आ चुके प्रदूषण पर भी चिंता जताई। पर्यटकों का कहना है कि भीड़ बढ़ते ही कई स्थानों पर दाम अचानक कई गुना बढ़ा दिए गए। सुविधा और प्रीमियम अनुभव के नाम पर अनावश्यक शुल्क लेने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कुछ मामलों में सेवाओं की गुणवत्ता अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही, जिससे ठगी का एहसास और गहरा हुआ। दिल्ली से परिवार के सदस्यों के साथ आए सुधीर कुमार ने बताया कि यहां का वातावरण ट्यूरिस्ट-फ्रेंडली है। उन्हें यहां भ्रमण करने पर कई अच्छे अनुभव हुए हैं। हालांकि कुछ जगह निराशा भी हुई है। दिल्ली निवासी दिव्या ने बताया कि उन्हें सम सेंड ड्यून्स में केमल व जीप सफारी करने में बहुत लुत्फ आया। सीमा क्षेत्र की सडक़ें इतनी शानदार हैं कि देख कर मजा आ गया। यहां सुविधाओं के दाम कुछ ज्यादा देने पड़े।
इसी तरह से शहर भ्रमण कर रहे राजस्थान के ही सैलानियों के एक अन्य दल में शामिल पर्यटक पूजा और गौरव ने बताया कि वे एक दिन पहले ही जैसलमेर पहुंचे। यहां ठहराव और घूमना महंगा पड़ा, जिससे उन्हें ठगी का अहसास हुआ। गुजरात के बड़ौदा निवासी प्रफुल्ल, श्वेता और कल्पेश भाई ने बताया कि जैसलमेर का सोनार दुर्ग, पटवा हवेलियां और गड़ीसर सरोवर अपने आप में नायाब हैं। उन्होंने भी व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत बताई। कल्पेश भाई ने बताया कि जैसलमेर आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा पर और ध्यान देने की आवश्यकता है। विशेषकर दर्शनीय स्थलों पर बहुत भीड़-भड़क्का होने की स्थिति में कभी भी उनके साथ कोई अवांछनीय हरकत कर सकता है। पर्यटकों का कहना है कि दिन में जगह-जगह पुलिस व होमगाड्र्स की तैनाती नजर आई, लेकिन रात में ऐसा नहीं दिखा।