
लाठी @ पत्रिका. क्षेत्र के भादरिया गांव स्थित भादरिया धाम में शनिवार को बीकानेर जिले के देवासर गांव निवासी शुभम सिंह भाटी ने देश में अमन-चैन, सुख-समृद्धि, भाईचारे और अच्छी बारिश की कामना को लेकर करीब 10 किलोमीटर लंबी कनक दंडवत यात्रा पूरी की। युवक शुभम भाटी ने भीषण गर्मी के बीच भादरिया फांटे से भादरिया धाम तक दंडवत करते हुए अपनी यात्रा पूरी की। शुभमसिंह भाटी ने बताया कि देश में शांति, भाईचारा, सुख-समृद्धि और समय पर अच्छी बारिश की कामना को लेकर उन्होंने यह संकल्प किया था। यात्रा के दौरान वे ईश्वर का स्मरण करते हुए आगे बढ़ते रहे। उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त बारिश मिले, क्षेत्र में हरियाली बढ़े और देश में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहे, यही उनकी कामना है। करीब 10 किलोमीटर की कनक दंडवत यात्रा पूरी कर भादरिया धाम पहुंचने के बाद शुभम सिंह भाटी ने भादरिया की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद राय माता मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर देशवासियों के सुख, समृद्धि, खुशहाली और अच्छी वर्षा की प्रार्थना की। पवन सिंह भाटी ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल पक्ष पर भादरिया धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
पोकरण ( जैसलमेर ) @ पत्रिका. लोकदेवता बाबा रामदेव के भादवा मेले में भाग लेने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पोकरण पहुंच रहे हैं। शनिवार को जोधपुर के बड़े पदयात्री संघों ने पोकरण में पड़ाव डाला, जिससे कस्बा पूरी तरह धर्ममय हो गया। चारों तरफ बाबा के जयकारों और भजनों की गूंज सुनाई दे रही थी। जोधपुर से आए सांसी समाज, क्षत्रिय माली समाज, बंजारा समाज, खटीक समाज, मेघवाल समाज के अलग-अलग संघों और 36 कौम के एक संघ ने पोकरण में विशाल झंडा रैली निकाली। जोधपुर रोड से कस्बे में प्रवेश कर अस्पताल रोड, जय नारायण व्यास सर्कल तक यह रैली पहुंची। आधे पदयात्रियों ने अंबेडकर सर्कल और राउमावि मैदान की तरफ पड़ाव डाला, जबकि शेष मदरसा रोड, जैसलमेर रोड होते हुए शक्तिस्थल के आसपास रुके। बड़े-बड़े झंडे लिए श्रद्धालु डीजे की तेज धुन पर भजनों के साथ नृत्य करते और आतिशबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे थे। एक किलोमीटर का सफर तय करने में रैली को दो घंटे का समय लगा। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बाबा रामदेव की क्रीड़ास्थली और उनके गुरु बालीनाथ के जन्मस्थान पोकरण में एक रात रुककर जागरण व भजन कीर्तन करने से पदयात्रा का फल मिलता है। स्थानीय लोग भी इन संघों के विशाल झंडों, बाबा के कपड़ों से बने घोड़ों और वाहनों में सजे मंदिरों को देखने के लिए उमड़ पड़े। रात में भजन कार्यक्रमों में भी स्थानीय लोगों की भीड़ लगी रही।