सरहदी जैसलमेर का आसमान अब केवल पतंगों का नहीं, बल्कि रोमांच, तकनीक और इवेंट टूरिज्म की नई उड़ान का प्रतीक बनता जा रहा है—जो मरुस्थल को राष्ट्रीय पर्यटन की मुख्य धारा में मजबूती से स्थापित कर रहा है।
सरहदी जैसलमेर का आसमान अब केवल पतंगों का नहीं, बल्कि रोमांच, तकनीक और इवेंट टूरिज्म की नई उड़ान का प्रतीक बनता जा रहा है—जो मरुस्थल को राष्ट्रीय पर्यटन की मुख्य धारा में मजबूती से स्थापित कर रहा है। सुनहरी रेत, ऐतिहासिक दुर्ग और लोक संस्कृति के लिए पहचाना जाने वाला जैसलमेर अब इवेंट टूरिज्म और स्काई स्पोर्ट्स के जरिए राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना रहा है।
पतंगबाजी तक सीमित आसमानी गतिविधियों से आगे बढ़कर अब मरुस्थल का आसमान पैरामोटरिंग, पैराग्लाइडिंग, ड्रोन शो और एरियल परफॉर्मेंस का मंच बनता जा रहा है और आधुनिक एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में देश-दुनिया में उभर रहा है। सम, कनोई व दामोदरा क्षेत्र में रेत पर रफ्तार और आसमान में उड़ान का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। जीप सफारी और क्वाड बाइकिंग के साथ पैराग्लाइडिंग और पैरामोटरिंग पर्यटकों को थार मरुस्थल का विहंगम दृश्य दिखा रही हैं। सूर्यास्त के समय होने वाली एरियल उड़ानें और रात में आयोजित ड्रोन शो इवेंट टूरिज्म को नई ऊंचाई दे रहे हैं, जिससे जैसलमेर देश के अन्य डेजर्ट डेस्टिनेशन से अलग पहचान बना रहा है।
स्काई स्पोर्ट्स आधारित इवेंट्स ने युवाओं के साथ विदेशी पर्यटकों को भी बड़ी संख्या में आकर्षित किया है। सर्दियों के सीजन में यूरोप और एशिया से आने वाले पर्यटक इन गतिविधियों को अपने ट्रैवल प्लान का अहम हिस्सा बनाते हैं। युवाओं को पायलट सहायक, ग्राउंड स्टाफ, सुरक्षा कर्मी, टूर गाइड और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कार्यों में रोजगार मिल रहा है।
बढ़ती लोकप्रियता के साथ सुरक्षा प्रबंधों की आवश्यकता भी सामने आई है। मौसम आधारित अनुमति, तकनीकी जांच, प्रशिक्षित मानव संसाधन और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता को अनिवार्य माना जा रहा है, ताकि स्काई स्पोर्ट्स को सुरक्षित और टिकाऊ रूप में विकसित किया जा सके।
-38 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल है सरहदी जैसलमेर जिले का
-2 हजार के करीब पर्यटक इन दिनों प्रतिदिन पहुंच रहे सम व खुहड़ी क्षेत्र में
-10 हजार से अधिक लोगों को पर्यटन से जैसलमेर में मिल रहा प्रत्यक्ष रोजगार