
जैसलमेर @ पत्रिका. रात के अंधेरे में घरों को निशाना बनाना, मोबाइल फोन बंद रखना और वारदात स्थल से कई किलोमीटर दूर साथियों को उतारकर निकल जाना। अंतरराज्यीय नकबजन गिरोह की वारदात का तरीका ऐसा था कि पुलिस के सामने आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती थी। जैसलमेर जिला पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, मानवीय आसूचना और लगातार निगरानी के आधार पर गिरोह का पर्दाफाश कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने जैसलमेर जिले के चेलक, सांवला, भैंसड़ा, झाबरा, फतेहगढ़ और फलसूंड क्षेत्र में घरों में घुसकर चोरी की वारदातें करना स्वीकार किया है। गिरोह से अन्य वारदातों के संबंध में पूछताछ जारी है।
मामले की शुरुआत 5 अक्टूबर की रात भैंसड़ा गांव में हुई दो नकबजनी की वारदातों से हुई। चोरों ने भंवरूराम के घर में कमरे और सूटकेस के ताले तोड़कर सोने की अंगूठी, चार जोड़ी सोने के लूंग, चांदी की कटोरी, चार चांदी के सिक्के और छह हजार रुपए नकद चुरा लिए। इसी रात उनके चचेरे भाई राजेश कुमार के घर में भी पीछे के दरवाजे से प्रवेश कर कमरे और अलमारी के ताले तोड़े गए। यहां से करीब 30 तोला चांदी की पायजेब और 50 हजार रुपए नकद चोरी किए गए। सांकड़ा थाने में 6 अक्टूबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश सांखला और वृत्ताधिकारी रूपसिंह ईंदा के सुपरविजन में विशेष टीमें गठित की गईं। सांगड़, सांकड़ा और सदर जैसलमेर थाना पुलिस ने घटनास्थलों और संभावित आवागमन मार्गों का विश्लेषण किया। मुखबिर तंत्र सक्रिय करने के साथ तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया गया। संदिग्धों की गतिविधियों से जुड़े सुराग मिलने पर जांच चित्तौड़गढ़ जिले तक पहुंची। सांगड़ थानाधिकारी राजेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने चित्तौड़गढ़ जिला विशेष टीम के सहयोग से कार्रवाई कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य मोबाइल फोन बंद कर ट्रेलर, ईको और बोलेरो जैसे वाहनों से वारदात वाले क्षेत्र में पहुंचते थे। घरों को निशाना बनाने के लिए वाहन से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर कुछ सदस्यों को उतार दिया जाता था। वाहन लेकर जाने वाले साथी तय स्थान पर लौटने का समय निर्धारित कर आगे निकल जाते थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य गांव में घुसकर मकानों की पहचान करते और चोरी करते थे। तय समय पर वाहन वापस पहुंचता और आरोपी साथियों को लेकर चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र की ओर रवाना हो जाते थे।
गिरफ्तार आरोपियों में जसवंत कंजर और लोकेश कंजर निवासी बेगूं क्षेत्र, बहादुर दरोगा और धर्मराज दरोगा निवासी सुवाणिया तथा राहुल कुमार सोनी निवासी बावलास, जिला चित्तौड़गढ़ शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने 6 अक्टूबर को चेलक, 7 सितंबर को सांवला, 5 अगस्त को झाबरा, 17 मार्च को फतेहगढ़ और करीब सात से आठ महीने पहले फलसूंड क्षेत्र में नकबजनी की वारदातें करना भी स्वीकार किया है। पुलिस गिरोह से अन्य वारदातों के संबंध में पूछताछ कर रही है। प्रकरण के खुलासे में सांगड़ थाना पुलिस, कोतवाली और खुहड़ी थाना पुलिस तथा जिला विशेष टीम चित्तौड़गढ़ की अहम भूमिका रही।