
बाजार में सजी दुकानें।
जैसलमेर. घर की सजावट में नया प्रयोग करने के लिए अब महंगे डेकोर आइटम ही एकमात्र विकल्प नहीं हैं। दीपावली से पहले जैसलमेर के सदर बाजार में मिट्टी से बने रंगीन झूमर, डिजाइनर गमले, सजावटी गुल्लक और कलात्मक मूर्तियां घरों को नया लुक देने के विकल्प के रूप में सजी हैं। इन उत्पादों में पारंपरिक कारीगरी के साथ रंगों और डिजाइन का ऐसा मेल दिख रहा है, जो इन्हें सामान्य घरेलू सामान से अलग पहचान देता है। कोई बालकनी के लिए रंगीन गमले तलाश रहा है, तो कोई प्रवेश द्वार और आंगन को सजाने के लिए मिट्टी के झूमर पसंद कर रहा है। सजावटी सामान की यह विविधता घर के अलग-अलग हिस्सों को अपनी पसंद के मुताबिक संवारने का अवसर देती है। आधुनिक सजावट के बीच मिट्टी के उत्पादों की मौजूदगी स्थानीय कारीगरी को भी नया मंच दे रही है।
सदर बाजार में मिट्टी के सजावटी सामान की दुकानों पर रंगों और आकारों की विविधता नजर आ रही है। रंगीन गमले घर की बालकनी, प्रवेश द्वार और आंगन को सजाने के काम आते हैं, जबकि झूमर खाली कोनों और छत के हिस्सों को आकर्षक बनाने का विकल्प देते हैं। सजावटी मूर्तियां और रंगीन गुल्लक भी इस बाजार का हिस्सा हैं। अलग-अलग कीमतों में उपलब्ध ये उत्पाद त्योहार पर घर को नया रूप देने के लिए विकल्प बढ़ाते हैं। मिट्टी के झूमर सजावटी सामान में खास आकर्षण पैदा करते हैं। इनकी बनावट, रंग और आकार घर की सजावट को पारंपरिक अंदाज देते हैं। इन्हें प्रवेश द्वार, आंगन या घर के दूसरे हिस्सों में सजाया जा सकता है। बाजार में करीब 90 से 100 रुपए तक के झूमर उपलब्ध हैं। रंगीन और कलात्मक डिजाइन इन्हें सामान्य सजावटी वस्तुओं से अलग बनाते हैं।
पौधों के साथ रंगीन गमलों का इस्तेमाल घर की सजावट में नया प्रभाव पैदा करता है। बाजार में अलग-अलग आकार और डिजाइन के गमले उपलब्ध हैं। इन पर बने रंगीन चित्र और सजावटी पैटर्न इन्हें केवल पौधे रखने का पात्र नहीं, बल्कि डेकोर का हिस्सा बनाते हैं। प्रवेश द्वार, बालकनी और आंगन में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। कीमत 30 से 100 रुपए तक होने से बजट के अनुसार विकल्प मिलते हैं। मिट्टी के गुल्लक और मूर्तियां उपयोगिता के साथ सजावट में भी जगह बना रही हैं। रंगीन गुल्लक बच्चों के लिए बचत की शुरुआत का माध्यम हैं, वहीं आकर्षक चित्रों और आकारों वाली मूर्तियां घर के सजावटी कोनों में रखी जा सकती हैं। शुभ-लाभ और देवी लक्ष्मी से जुड़े चित्रों वाले गुल्लक दीपावली के माहौल के अनुकूल हैं। इन उत्पादों में पारंपरिक प्रतीकों और रंगों का इस्तेमाल इन्हें त्योहार की खरीदारी से जोड़ता है।
मिट्टी के सजावटी उत्पाद तैयार करने में आकार देने, सुखाने, पकाने और रंगाई तक कई चरण शामिल हैं। डिजाइन के अनुसार इन पर अतिरिक्त काम भी करना पड़ता है। कुम्हारों की यह कारीगरी अब घरेलू जरूरतों के साथ सजावट के बाजार में भी जगह बना रही है। दीपावली से पहले दुकानों पर इन उत्पादों की उपलब्धता स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए बिक्री का अवसर है।
सामान — कीमत
मिट्टी के झूमर — 90 से 100 रुपए
गमले — 30 से 100 रुपए
सजावटी मूर्तियां — 50 से 200 रुपए
गुल्लक — 50 से 200 रुपए
कलश — 40 से 50 रुपए
दीये — 2 से 10 रुपए
तस्वीर – 100
तोरण – 100 से 350 रुपए तक
दीपावली पर बच्चों के लिए नया गुल्लक खरीदना कई परिवारों की परंपरा का हिस्सा है। इसमें सालभर छोटी-छोटी बचत जमा की जाती है। रंगीन और आकर्षक डिजाइन वाले गुल्लक उपयोगिता के साथ घर की सजावट में भी शामिल हो सकते हैं। बाजार में अलग-अलग आकार और कीमतों के विकल्प उपलब्ध हैं। सदर बाजार में सजावटी उत्पादों के साथ मिट्टी की कड़ाही, लोटा, थाली और मटकी जैसे घरेलू बर्तन भी मिलते हैं। मूर्तियां, गमले और दूसरे उत्पादों के साथ इनकी उपलब्धता ग्राहकों को एक ही जगह कई विकल्प देती है।
स्थानीय बाजार को सहारा
दीपावली के दौरान सजावट और घरेलू जरूरतों की खरीदारी स्थानीय बाजार के कारोबार को सहारा देती है। दीपावली पर मिट्टी के झूमर, गमले, गुल्लक और मूर्तियां दुकान पर रखते हैं। ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार सामान चुनते हैं। त्योहार के समय सजावट के इन उत्पादों की बिक्री अच्छी रहने की उम्मीद रहती है।
— सवाईलाल, दुकानदार
मिट्टी के उत्पाद घर को देते हैं अलग पहचान
घर की सजावट में रंगीन गमले और मिट्टी के झूमर अच्छे लगते हैं। इनसे घर में पारंपरिक अहसास बना रहता है। बाजार में अलग-अलग डिजाइन मिलने से अपनी पसंद के अनुसार सजावटी सामान चुन सकते हैं।
- सुरेश कुमार भार्गव, दुकानदार
गुल्लक और गमलों से सजावट में उपयोगिता का मेल
बच्चों के लिए गुल्लक और घर के लिए रंगीन गमले खरीदे हैं। मिट्टी के सामान में पारंपरिक आकर्षण है। अलग-अलग कीमतों के विकल्प मिलने से बजट के अनुसार सजावट का सामान चुनना आसान रहता है।
— राजू भार्गव, दुकानदार
सजावटी सामान बनाने में डिजाइन पर मेहनत
मिट्टी के उत्पादों को आकार देने, सुखाने, पकाने और रंगने में मेहनत लगती है। सजावटी सामान में रंग और डिजाइन का काम भी महत्वपूर्ण होता है। दीपावली पर इन उत्पादों की बिक्री कारीगरों के लिए खास अवसर रहती है।
— अशोक कुमार, दुकानदार
Updated on:
29 Oct 2026, 8:30 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 8:29 PM IST
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