उपभोक्ता विवादों में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने जोधपुर वितरण निगम के औसत आधार पर जारी बिजली बिल को गलत माना और बिल निरस्त करने का आदेश दिया।
उपभोक्ता विवादों में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए जिला उपभोक्ता आयोग ने जोधपुर वितरण निगम के औसत आधार पर जारी बिजली बिल को गलत माना और बिल निरस्त करने का आदेश दिया। आयोग की पीठ अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गौड ने परिवादी महेश भाटिया के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए विद्युत विभाग को परिवादी को मानसिक परेशानी और परिवाद पेटे एकमुश्त 15 हजार रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया।
आदेश की पालना 45 दिन में नहीं होने पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा। प्रकरण में परिवादी ने बताया कि पिता सांगीदान भाटिया के नाम पर जारी विद्युत कनेक्शन के मीटर में खराबी थी। मकान अधनिर्मित और बंद होने के बावजूद विभाग ने वर्ष 2017 से 2019 तक औसत आधार पर 1,99,728 रुपये का बिल जारी किया। बिल सुधार के अनुरोध के बावजूद विभाग ने कोई राहत नहीं दी। विभाग का पक्ष था कि छह माह के बिलों को आधार मानकर सही बिल जारी किया गया। पत्रावली में प्रस्तुत साक्ष्यों के अवलोकन में आयोग ने पाया कि 15 सितंबर 2016 को नया मीटर लगाया गया जिसकी अगले ही महीने में रीडिंग में डिफेक्टिव की टिप्पणी अंकित थी।
इसके बाद मई 2019 तक अलग-अलग मीटर रीडरों ने मीटर खराब दिखाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विभाग को मीटर खराब होने की जानकारी थी। मीटर विभाग की संपत्ति होने से उसका बदलना और ठीक रखना विभागीय उत्तरदायित्व के अंतर्गत आता है।.आयोग ने माना कि लंबे समय तक खराब मीटर के बावजूद औसत आधार पर मनमर्जी से बिल जारी करना अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है। इसी आधार पर बिल निरस्त कर वाद परिवादी के पक्ष में निर्णित किया गया।