
जैसलमेर. जैसलमेर में नगरपरिषद चुनाव में मतदान खत्म होते ही सियासत का एक नया दौर शुरू हो गया है। मतदाताओं ने अपना फैसला ईवीएम में बंद कर दिया, लेकिन राजनीतिक दलों की धडकऩें अभी थमी नहीं हैं। अब नजरें परिणाम से ज्यादा उन संभावित समीकरणों पर हैं, जो 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद बनेंगे। इसी आशंका के बीच भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी कर दी है। सूत्रों के अनुसार दोनों दलों के पार्षद प्रत्याशियों को जिले से बाहर होटल और रिसोट्र्स में अज्ञात स्थानों पर रखा गया है। बताया जा रहा है कि प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ ही दूसरे दल की ओर से संपर्क और संभावित टूट-फूट को रोकना बाड़ाबंदी का प्रमुख उद्देश्य है। राजनीतिक दल इसे लेकर खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन चुनावी हलकों में बाड़ाबंदी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। वेसे कांग्रेस के कुछ प्रमुख चेहरे अब भी बाड़ेबंदी से बाहर हैं और शहर में नजर आ रहे हैं।
चुनाव परिणाम से पहले प्रत्याशियों की आवाजाही और आपसी संपर्क को लेकर दोनों प्रमुख दल बेहद सतर्क बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्रत्याशियों को समूह में रखा गया है और उनके ठहरने के स्थान को गोपनीय रखा जा रहा है। मोबाइल फोन के इस्तेमाल और बाहरी लोगों से संपर्क को लेकर भी निगरानी की चर्चा है। दरअसल, इस बार कई वार्डों में निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। ऐसे में यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अचानक बढ़ सकती है। यही संभावना राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा रही है। परिणाम आने के बाद अध्यक्ष पद के लिए बहुमत जुटाने की कवायद में एक-एक पार्षद महत्वपूर्ण हो सकता है।
पोकरण नगरपालिका चुनाव के बाद शुक्रवार को भी प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी किए जाने की जानकारी सामने आई है। यहां भी प्रमुख दल अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। मतदान के बाद शुरू हुई इस कवायद को परिणाम से पहले संभावित राजनीतिक सेंधमारी से बचाव के तौर पर देखा जा रहा है। स्थानीय निकाय चुनावों में अक्सर मतदान और परिणाम के बीच का समय सबसे अधिक राजनीतिक हलचल वाला रहता है। इस दौरान जीत-हार के अनुमान, निर्दलीयों से संपर्क और बहुमत के आंकड़े को लेकर अंदरखाने बातचीत शुरू हो जाती है। जैसलमेर में भी अब यही दौर दिखाई दे रहा है। मतदान केंद्रों से निकल चुके प्रत्याशी अब मतगणना तक होटल-रिसोर्ट के ‘सियासी किलों’ में रहेंगे या कब बाहर आएंगे, इसे लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि ईवीएम में फैसला बंद होने के बावजूद सत्ता की असली बाजी अभी बाकी है।