पोकरण कस्बे के आशापुरा मंदिर में आगामी 27 से 31 दिसंबर तक 15वां शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जिसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है।
पोकरण कस्बे के आशापुरा मंदिर में आगामी 27 से 31 दिसंबर तक 15वां शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जिसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। बीकानेर के आचार्य पंडित अशोक बिस्सा सन्ना महाराज ने बताया कि जब देवताओं व राक्षसों की ओर से किए गए समुंद्र मंथन के दौरान महालक्ष्मी प्रकट हुई, तब सबसे पहले उसका शतचंडी यज्ञ के साथ महर्षि पूजन किया गया और मळमास के दौरान मकर सक्रांति के मौके पर भारत खंड के स्वयंभू प्रथम मानव महर्षि मनु ने सबसे पहले महालक्ष्मी का शतचंडी यज्ञ के साथ पूजन किया। इसलिए इस यज्ञ का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है और यह यज्ञ मल मास में सरोवर अथवा नदी के किनारे किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस यज्ञ के साथ मां जगदम्बा के सभी रूपों का आह्वान कर दुर्गाशप्तशति के पाठ एवं हवनात्मक यज्ञ किया जाता है।
आचार्य पंडित बिस्सा ने बताया कि गत 15 वर्षों से प्रतिवर्ष मल मास में 27 से 31 दिसंबर तक आशापुरा माता मंदिर में भारतीय लघु पंचांग परिवार एवं बीकानेर व पोकरण के श्रद्धालुओं के सहयोग से शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 27 दिसंबर से शतचंडी महायज्ञ शुरू किया जाएगा। इस दिन सुबह 9 बजे प्रायश्चित कर्म, हिमाद्री संकल्प, दस विधि स्नान, सरोवर पूजन, कलश पूजन कर सवा 10 बजे कलश यात्रा निकाली जाएगी और मंडप प्रवेश पूजन किया जाएगा। इसके बाद हवनात्मक यज्ञ शुरू किया जाएगा। 5 दिनों तक शतचंडी यज्ञ के दौरान दुर्गाशप्तशति के पाठ कर हवनात्मक यज्ञ किया जाएगा। इसमें यजमानों की ओर से आहुतियां दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि पहले दिन कन्या पूजन व मंडपस्थ स्थित देवताओं का आह्वान कर पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद लगातार पांच दिनों तक सुबह व शाम दो पारियों में यज्ञ किया जाएगा। इसमें सुबह होने वाले यज्ञ में सामान्य हवन सामग्री और शाम को सूक्त पाठ के साथ ड्राइफ्रूट पंचमेवों एवं औषधियों की आहुति दी जाएगी। साथ ही दोपहर में मां भगवती का गुलाब के पुष्पों से अर्चन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यज्ञ की पूर्णाहुति 31 दिसंबर को की जाएगी।