
नाचना. भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं, वहीं उन्हीं सीमाओं के समीप गांवों में बसे हजारों ग्रामीणों के जीवन की रक्षा का दायित्व सीमांत क्षेत्रों में कार्यरत चिकित्सक निभा रहे हैं। जैसलमेर जिले के सरहदी कस्बे नाचना का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इसी समर्पण का जीवंत उदाहरण है। भीषण गर्मी, रेतीले रास्ते, लंबी दूरियां और सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियों के बीच यहां कार्यरत चिकित्सक वर्षों से लगातार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के लिए यह अस्पताल केवल उपचार का केंद्र नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली सबसे भरोसेमंद व्यवस्था बन चुका है।
पंचायत समिति नाचना का सबसे बड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतिदिन करीब 350 मरीजों की ओपीडी संभालता है। अस्पताल में नाचना सहित आसपास के लगभग 20 सीमावर्ती गांवों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। पहुंचे का तालाब, भारेवाला, बाहला, शेखोंवाला, साकड़िया, दिधू, अजासर, आसकंद्रा, अकालवाला, ढाकलवाला, पांचे का तला, चीनू सहित अनेक गांवों के लोग नियमित रूप से इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। कई गांवों से मरीजों को उपचार के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, फिर भी उनकी पहली पसंद यही अस्पताल रहता है। सीमांत भारत की मजबूती में उनका योगदान भी किसी सेवा मिशन से कम नहीं है।
मरुस्थलीय क्षेत्र में गर्मियों के दौरान तापमान अक्सर 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है। ऐसे कठिन मौसम में भी चिकित्सकीय सेवाएं बिना किसी व्यवधान के जारी रहती हैं। चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. रवि सांखला, चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार, आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक तथा दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. रामनिवास शर्मा नियमित रूप से मरीजों का उपचार कर रहे हैं। सामान्य रोगों से लेकर आपात स्थिति तक, हर मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
-सीमावर्ती क्षेत्रों की चर्चा अक्सर सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से होती है, जबकि स्वास्थ्य सुविधाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
- मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था सीमांत गांवों में रहने वाले लोगों का विश्वास बनाए रखती है, पलायन की प्रवृत्ति कम करती है।
-कठिन परिस्थितियों में भी जनजीवन को सामान्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
-नाचना का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक केवल मरीजों का इलाज नहीं कर रहे, बल्कि सीमांत भारत के आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रहे हैं।