जैसलमेर

jaisalmer: रेगिस्तान की लंबी सड़कें, चालक की थकान और सड़क सुरक्षा का अनदेखा सवाल

जैसलमेर। पश्चिमी राजस्थान की लंबी सड़कें सड़क सुरक्षा के सामने चालक की थकान और पर्याप्त विश्राम की चुनौती भी खड़ी कर रही हैं। जैसलमेर-बाड़मेर जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र में लंबी दूरी के मालवाहक वाहनों के चालकों के लिए नींद, विश्राम और लगातार ड्राइविंग अहम सुरक्षा कारक हैं। हालांकि उपलब्ध आंकड़े थकान को हादसों का प्रमुख कारण साबित नहीं करते, लेकिन सुरक्षित विश्राम सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल जरूर उठाते हैं।
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Aug 18, 2026
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 एआइ

जैसलमेर. पश्चिमी राजस्थान की लंबी सड़कें सड़क सुरक्षा को लेकर ऐसा सवाल गहरा रहा है, जिसका जवाब केवल रफ्तार, वाहन और सड़क की स्थिति से नहीं मिलता। जैसलमेर-बाड़मेर जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र में लंबी दूरी तक मालवाहक वाहन चलाने वाले चालकों के लिए नींद, विश्राम और लगातार वाहन चलाने की अवधि भी सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलू हैं। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इन जिलों में होने वाले हादसों का प्रमुख कारण चालक की थकान है। सवाल यह है—लंबी दूरी तय करने वाले चालक को रास्ते में पर्याप्त और सुरक्षित विश्राम की सुविधा कितनी आसानी से मिलती है? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 20 अगस्त 2025 को राज्यसभा में अवगत कराया था कि वर्ष 2017 से राज्यों से दुर्घटना आंकड़े लेने के लिए लागू संशोधित प्रारूप में चालक की थकान, उनींदापन या बीमारी से हुई दुर्घटनाओं की अलग रिपोर्टिंग का प्रावधान नहीं है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट यानी ई-डार में चालक की उनींदापन, स्वास्थ्य समस्या, लंबी दूरी और थकान जैसे कारकों से जुड़ी जानकारी ‘लंबी दूरी तय या चालक बेचैन’ श्रेणी में जुटाई जाती है।

दुर्घटना जांच में पांच तथ्यों को शामिल करने की दरकार

-हादसे से पहले चालक कितने घंटे वाहन चला रहा था?

-पिछले 24 घंटे में उसे कितना वास्तविक विश्राम मिला?

-आखिरी बार वाहन रोककर आराम कब किया?

-दुर्घटना दिन में हुई या रात के समय?

-घटनास्थल से सुरक्षित पार्किंग और विश्राम सुविधा कितनी दूर थी?

453 चालकों के अध्ययन ने उनींदापन और उल्लंघन का संबंध दिखाया

453 लंबी दूरी के ट्रक चालकों पर किए गए अध्ययन में चालक की उनींदापन और यातायात नियमों के उल्लंघन के बीच संबंध का परीक्षण किया गया। चालकों से तीन भारतीय शहरों से जुड़े राजमार्गों पर भोजनालयों और विश्राम स्थलों के आसपास जानकारी जुटाई गई। शोध में काम और विश्राम की दिनचर्या सहित चालक के सुरक्षा व्यवहार को भी देखा गया। अध्ययन में लंबे काम के घंटे, अपर्याप्त नींद, आधी रात के बाद वाहन चलाने और वाहन चलाते समय उनींदापन को यातायात उल्लंघनों से जुड़े महत्वपूर्ण कारकों के रूप में पाया गया। यह शोध जैसलमेर-बाड़मेर के हादसों का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, लेकिन लंबे मार्गों पर चालक की नींद, काम और विश्राम को सड़क सुरक्षा के नजरिए से जांचने का वैज्ञानिक आधार जरूर देता है।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 40–60 किलोमीटर के अंतराल पर सुविधाएं विकसित करने की योजना

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 40 से 60 किलोमीटर के अंतराल पर आधुनिक सड़क किनारे सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई है। इनमें भोजनालय, ढाबे, स्वच्छ शौचालय, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, कार-बस-ट्रक पार्किंग और ट्रक चालकों के लिए विश्राम सुविधाएं शामिल हैं। नवंबर 2025 तक 700 से अधिक नियोजित सड़क किनारे सुविधाओं में से 510 को अवार्ड किया जा चुका था और इनमें 110 परिचालन में थे। गत 22 जून 2026 को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स प्रबंधन लिमिटेड यानी एनएचएलएमएल ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों को सड़क किनारे सुविधाओं पर वाहन मरम्मत और पंचर सुधार सेवाएं जल्द स्थापित कराने को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए। इसका उद्देश्य वाहन खराब होने पर समय पर यांत्रिक सहायता उपलब्ध कराना, वाहन के खड़े रहने का समय कम करना और सड़क सुरक्षा मजबूत करना है। यह निर्देश राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर स्थित सड़क किनारे सुविधाओं से संबंधित है।

एक्सपर्ट व्यू: थकान को केवल चालक की लापरवाही मानना अधूरा नजरिया

चालक की थकान को केवल व्यक्तिगत लापरवाही के नजरिए से देखना सड़क सुरक्षा की पूरी तस्वीर नहीं देता। यात्रा की दूरी, काम के घंटे, नींद, रात में वाहन चलाना, सुरक्षित पार्किंग और विश्राम सुविधा को साथ रखकर जोखिम का आकलन करना जरूरी है। जैसलमेर-बाड़मेर के लंबे मार्गों पर सड़क सुरक्षा की स्थानीय पड़ताल में केवल ब्लैक स्पॉट, तेज गति और सड़क की स्थिति ही नहीं, बल्कि चालक ने कितनी दूरी तय की, कितनी देर वाहन चलाया और उसे सुरक्षित विश्राम कहां मिला—इन सवालों को भी शामिल करने की जरूरत है।

- सुमेरसिंह राजपुरोहित, सड़क सुरक्षा विषयों के जानकार

Updated on:
18 Aug 2026 09:03 pm
Published on:
18 Aug 2026 09:03 pm