सीमावर्ती जैसलमेर से गुजरात के भाभर तक प्रस्तावित नई रेल लाइन परियोजना के काम में तेजी आने के संकेत हैं। उत्तर-पश्चिम रेलवे की ओर से करीब 380 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिसके तहत ड्रोन और डीजीपीएस के जरिए टोपोग्राफिकल सर्वे शुरू कर दिया गया है।
सीमावर्ती जैसलमेर से गुजरात के भाभर तक प्रस्तावित नई रेल लाइन परियोजना के काम में तेजी आने के संकेत हैं। उत्तर-पश्चिम रेलवे की ओर से करीब 380 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिसके तहत ड्रोन और डीजीपीएस के जरिए टोपोग्राफिकल सर्वे शुरू कर दिया गया है। जोधपुर मंडल के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) की ओर से जैसलमेर सहित संबंधित जिलों के कलक्टर को जारी पत्र के अनुसार, जैसलमेर से वाया बाड़मेर होते हुए गुजरात के भाभर तक बनने वाली इस नई लाइन के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण का कार्य प्रगति पर है।
इस सर्वे में जमीन की ऊंचाई, ढलान और भौगोलिक बाधाओं का सटीक विवरण जुटाने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। रेलवे ने जैसलमेर, बाड़मेर और जालोर के जिला कलक्टरों को पत्र लिखकर फील्ड में काम कर रही सर्वे टीम के लिए प्रशासनिक सहयोग और सुरक्षा देने का अनुरोध किया है। सर्वे दल वर्तमान में फील्ड में तैनात है। कार्य के दौरान स्थानीय निवासियों और हितधारकों के साथ बेहतर समन्वय बना रहे और किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए पुलिस और प्रशासन का सहयोग अपेक्षित है।
जैसलमेर से भाभर तक रेल लाइन बिछाए जाने का यह प्रोजेक्ट पिछले करीब एक दशक से भी ज्यादा समय से प्रस्तावित है। यह जैसलमेर के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके जरिए गुजरात तक रेल का सीधा जुड़ाव हो सकेगा और यहां के व्यापार-धंधों में तेजी आ सकेगी। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में भी यह लाइन कारगर साबित हो सकेगी। वर्तमान में जैसलमेर से गुजरात जाने के लिए बाड़मेर और सांचौर होते हुए अधिकांशत: सडक़ मार्ग का उपयोग किया जाता है और रेल से वाया जोधपुर होकर जाना पड़ता है।