जैसलमेर

तपती धरती पर जल संरक्षण की उम्मीद ले रही आकार, श्रम की बूंदों से खिल रहा सौन्दर्य

ग्रामीणों के अनुसार मानव श्रम व मशीनों के माध्यम से किया जा रहा यह कार्य केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवन के बीच संतुलन साधने का प्रयास भी है।

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May 26, 2026
जैसलमेर. राजस्थान पत्रिका के अमृतम जन्म अभियान के तहत उत्तरी छत्रैल में चल रहा जल स्रोत को निकालने का कार्य।

थार की तपती धरती पर जल संरक्षण की एक नई उम्मीद आकार ले रही है। उत्तरी छत्रैल में राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् अभियान के अंतर्गत कवायद ग्रामीण जीवन में जल सुरक्षा का नया अध्याय लिख रही है। मंगलवार को भी यह कवायद राजस्थान पत्रिका के आह्वान पर एसबीआइ फाउंडेशन तथा उरमूल ट्रस्ट के संयुक्त सहयोग से साकार हो रूप लेने लगी। परियोजना के अंतर्गत गांव की सार्वजनिक नाड़ियों का गहरीकरण, पालों का सुदृढ़ीकरण और कैचमेंट क्षेत्र की सफाई का कार्य निरंतर गति से आगे बढ़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार मानव श्रम व मशीनों के माध्यम से किया जा रहा यह कार्य केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि प्रकृति और जीवन के बीच संतुलन साधने का प्रयास भी है। बरसात के जल को संजोने की दिशा में किए जा रहे ये प्रयास आने वाले समय में नाड़ियों को अधिक जलधारण क्षमता प्रदान करेंगे। गौरतलब है कि वर्षों से सूखी और उपेक्षित पड़ी नाड़ियों में अब पुनः जीवन की संभावना दिखाई देने लगी है।

हटाई जा रही अवांछित झाड़ियां

कैचमेंट क्षेत्र से हटाई जा रही अवांछित झाड़ियाँ वर्षा जल के सुचारु प्रवाह का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। इससे आगामी ऋतु में जल संचयन अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। ग्रामीणों में इस पहल को लेकर उत्साह और भरोसा दोनों स्पष्ट दिखाई देते हैं। यह परियोजना न केवल जल संरक्षण का माध्यम बन रही है, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और पर्यावरणीय चेतना को भी नई दिशा दे रही है।

भू-जल विभाग ने जैसलमेर में जल संरक्षण गतिविधियां आयोजित कीं

राज्य सरकार के वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026 एवं कर्म भूमि से मातृ भूमि अभियान के तहत मंगलवार को भू-जल विभाग ने जिले में जनजागरूकता और संरक्षण गतिविधियां आयोजित कीं। अभियान के तहत ग्राम पंचायत बरमसर में आयोजित ग्राम सभा में भू-जल विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण की आवश्यकता बताई। यहां उपस्थित महिलाओं एवं ग्रामीणों को जल संरक्षण की सामूहिक शपथ भी दिलाई गई। वरिष्ठ भू-जल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया ने बताया कि अभियान के तहत जैसलमेर के प्राचीन तीर्थ स्थल रामकुण्डा पर कूप पूजन कार्यक्रम हुआ। यहां पंडित ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रामकुण्ड का विधिवत पूजन कराया। उन्होंने बताया कि रामकुण्डा स्थित प्राचीन बावड़ी के पुनरुद्धार कार्य का शुभारम्भ भी भामाशाहों के सहयोग से किया गया।

Published on:
26 May 2026 09:04 pm
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