इंदिरा गांधी नहर के अंतिम छोर जीरो आरडी पर सिंचाई पानी की भारी किल्लत को लेकर किसानों का बेमियादी धरना बुधवार को सातवें दिन भी जारी रहा। गत छह दिनों से लगातार चल रहे इस आंदोलन ने अब उग्र रूप ले लिया है।
इंदिरा गांधी नहर के अंतिम छोर जीरो आरडी पर सिंचाई पानी की भारी किल्लत को लेकर किसानों का बेमियादी धरना बुधवार को सातवें दिन भी जारी रहा। गत छह दिनों से लगातार चल रहे इस आंदोलन ने अब उग्र रूप ले लिया है। मंगलवार को धरना स्थल पर बड़ी संख्या में किसान पहुंचे, वहीं शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चार थानों का भारी पुलिस जाब्ता भी तैनात रहा।
धरना स्थल पर किसानों से वार्ता के लिए जैसलमेर जिला कलेक्टर की ओर से प्रतिनिधि के रूप में नायब तहसीलदार ललितजी चारण, रेग्यूलेशन के अधीक्षण अभियंता कप्तान मीणा, जैसलमेर जोन के अधीक्षण अभियंता राम अवतार मीणा, मधुसूदन सहित नहर विभाग के दो डिवीजन के अधिशासी अभियंता पहुंचे। प्रशासन व नहर विभाग के अधिकारियों और किसानों के बीच काफी देर तक बातचीत चली, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही।
किसानों ने कहा कि जब तक उनके हक का पूरा सिंचाई पानी नहीं दिया जाएगा, तब तक धरना स्थल से हटने का सवाल ही नहीं उठता। किसानों का आरोप है कि नहर प्रशासन द्वारा लगातार आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा, जिससे फसलों के सूखने का खतरा बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले छह दिनों से किसान इंदिरा गांधी नहर परियोजना के अंतिम छोर जीरो आरडी क्षेत्र में धरने पर बैठे हैं। दूर-दराज के गांवों से किसान लगातार धरना स्थल पर पहुंच रहे हैं। किसानों का कहना है कि जैसलमेर जोन अंतिम छोर होने के कारण उन्हें हर बार सिंचाई पानी से वंचित रखा जाता है, जबकि ऊपर के क्षेत्रों में भरपूर पानी छोड़ा जा रहा है। धरने में किसान नेता साहबान खां, लुंबा राम, अचलाराम चौधरी, तगाराम भांभू, गणेश काकड़, भंवरूराम सारण, जवाहरनगर सरपंच प्रतिनिधि किरताराम, निजाम खां, टिकुराम प्रधान प्रतिनिधि गिड़ा, इंदरपाल बिश्नोई, चूनाराम भील, पप्पूराम भील, जोगाराम मेघवाल, पोकर बिश्नोई, हनुमान बिश्नोई, पनाराम सियाग, बिरधाराम, सद्दाम हुसैन बाहला, यासीन बाहला, रावताराम सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
किसानों की बढ़ती संख्या और आंदोलन की तीव्रता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट नजर आया। धरना स्थल पर लगातार पुलिस निगरानी रखी जा रही है। वार्ता विफल रहने के बाद किसानों ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है।