जैसलमेर

जैसाण में ईंधन संकट गहराया, ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति -कीमत का दोहरा दबाव

शहरी क्षेत्र में भी पेट्रोल पम्पों पर डीजल की अनुपलब्धता जैसी स्थितियां सामने आ रही हैं। दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आमजन की आर्थिक चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल पम्प संचालक अपने स्तर पर 5 से 10 लीटर प्रति वाहन को डीजल का बेचान कर एक तरह की कोटा आधारित वितरण प्रणाली अपना रहे हैं।

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May 26, 2026
जैसलमेर. शहर के बाहरी क्षेत्र में शाम के समय पेट्रोल पम्प पर लगी वाहनों की कतार।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के बीच संघर्ष के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी के बीच अब पेट्रोल और डीजल की किल्लत के हालात भी सामने आने लगे हैं। सीमांत जैसलमेर जिले में इन दिनों ईंधन संकट जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की अनियमित सप्लाई से स्थिति बनी हुई है। कई गांवों और कस्बों के पंपों पर बार-बार स्टॉक खत्म होने से वाहन चालकों, किसानों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। शहरी क्षेत्र में भी पेट्रोल पम्पों पर डीजल की अनुपलब्धता जैसी स्थितियां सामने आ रही हैं। दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आमजन की आर्थिक चिंता और बढ़ा दी है। ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल पम्प संचालक अपने स्तर पर 5 से 10 लीटर प्रति वाहन को डीजल का बेचान कर एक तरह की कोटा आधारित वितरण प्रणाली अपना रहे हैं। उनका कहना है कि मांग की तुलना में आपूर्ति में कमी के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है।

जिले में विषम भौगोलिक हालात

जैसलमेर जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले जिले में ग्रामीण इलाकों के लोग पहले ही लंबी दूरी तय कर आवश्यक सेवाएं प्राप्त करते हैं। ऐसे में पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलने की स्थिति से लोगों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई स्थानों पर वाहन चालकों को 30 से 50 किलोमीटर दूर दूसरे पंपों तक जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सुबह उपलब्ध ईंधन शाम तक खत्म हो जाता है और अगले टैंकर का इंतजार करना पड़ता है। एक पेट्रोल पम्प संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सप्लाई का संकट तो है। पहले की भांति तेल उपलब्ध नहीं हो रहा है। इसके कारण राशनिंग करने के हालात बन रहे हैं। वहीं एक अन्य पम्प संचालक के अनुसार पूर्व में तेल कम्पनियां ऑर्डर करने पर टैंकर भिजवा देती थीं, अब वे पहले भुगतान की मांग करती हैं। जैसलमेर जिले में ज्यादातर पम्प संचालकों को बड़े ग्राहकों को उधारी पर तेल देना होता है। अब ऐसा करने की स्थिति में पम्प संचालक नहीं रह गए हैं।

जरीकेन में नहीं दिया जा रहा तेल

- शहर सहित गांवों में पेट्रोल पम्प संचालकों की तरफ से अब जरीकेन या छोटे-बड़े ड्रम में पेट्रोल या डीजल भर कर नहीं दिया जा रहा है।

- शहर के एक प्रमुख डीलर ने बताया कि हम फिलहाल वाहन चालकों को उनके वाहन में मांग के अनुसार तेल दे पा रहे हैं। जरीकेन या ड्रम में तेल नहीं दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में हालात कैसे होंगे, इस बारे में कोई नहीं बता सकता।

- डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि का सबसे ज्यादा असर खेती-किसानी सहित अन्य क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है।

- परिवहन क्षेत्र भी इस संकट से अछूता नहीं है। बस, ट्रक और टैक्सी संचालकों का कहना है कि डीजल महंगा होने से परिचालन लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर किराए और माल भाड़े पर पड़ रहा है।

- जानकारों का मानना है कि जैसलमेर जैसे जिले की भौगोलिक परिस्थितियों और वास्तविक मांग को ध्यान में रखते हुए अलग नीति की आवश्यकता है। ग्रामीण पेट्रोल पम्प संचालकों का कहना है कि यदि नियमित और पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित नहीं की गई तो आगामी समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

- स्थानीय नागरिक भारत भूषण, महेन्द्र माथुर, अशोक शर्मा आदि का कहना है कि प्रशासन और तेल कंपनियों को ग्रामीण क्षेत्रों के पंपों को अतिरिक्त आवंटन करने की जरूरत है। इसके साथ ही सप्लाई चक्र को नियमित बनाया जाने की दरकार है।

Published on:
26 May 2026 08:39 pm
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