जैसलमेर

Jaisalmer: हाईवे बने वाइल्डलाइफ ब्लैक स्पॉट… हर मोड़ पर जिंदगी और वन्यजीव दांव पर

जैसलमेर के लाठी क्षेत्र में सड़क नेटवर्क के विस्तार के साथ वन्यजीवों और वाहनों का टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों व ग्रामीण सड़कों पर नीलगाय, चिंकारा सहित अन्य वन्यजीवों की आवाजाही दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रही है। पिछले दो वर्षों में कई गंभीर हादसों में एक चालक की मौत, कई लोग घायल और अनेक वन्यजीवों की जान जा चुकी है, जिससे सड़क सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण की एकीकृत नीति की जरूरत महसूस होने लगी है।
2 min read
Jun 30, 2026
Antelope crossing road near truck
जंगल और सड़क के बीच बढ़ता टकराव, इंसान और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा पर सवाल।

लाठी (जैसलमेर ). सरहदी जिले में सड़क नेटवर्क तेजी से विस्तारित हुआ, लेकिन वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन मार्गों की सुरक्षा समान गति से विकसित नहीं हो सकी। हकीकत यह है कि सड़क सुरक्षा तथा वन्यजीव संरक्षण को अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एकीकृत नीति के रूप में देखने की आवश्यकता है। पश्चिमी राजस्थान का लाठी क्षेत्र अब केवल वन्यजीवों की मौजूदगी के लिए नहीं, बल्कि बढ़ते वाइल्डलाइफ ब्लैक स्पॉट के रूप में भी पहचान बनाने लगा है। राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों पर नीलगाय, चिंकारा, लोमड़ी, खरगोश जैसे वन्यजीवों की लगातार आवाजाही इंसानों और वन्यजीवों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। बीते दो वर्षों में केवल नीलगाय को बचाने के प्रयास में कई वाहन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें एक चालक की मौत, कई लोग घायल और अनेक वन्यजीव भी मौत या गंभीर चोट का शिकार बने हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल सड़क दुर्घटनाओं का मामला नहीं, बल्कि बदलते पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। जंगलों में भोजन, पानी और सुरक्षित आवास पर बढ़ता दबाव वन्यजीवों को आबादी और सड़कों तक खींच रहा है।

हाल के प्रमुख हादसे

• 25 जून 2026 : सोढ़ाकोर के पास नीलगाय बचाने के प्रयास में ट्रक हाईवे से नीचे उतरा, चालक घायल।

• 13 जून 2026 : सोढ़ाकोर के पास नीलगाय बचाने के दौरान ट्रक पलटा, चालक घायल।

• 12 अक्टूबर 2025 : दवाड़ा के पास बोलेरो पलटी, चालक की मौत।

• 6 जनवरी 2025 : खेतोलाई के पास कार पलटी, चालक घायल।

• 25 जून 2024 : चांधन के पास कार पलटी, तीन यात्री घायल।

• 16 अप्रेल 2024 : खेतोलाई के पास तहसीलदार की सरकारी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त।

क्यों बढ़ रहा खतरा

वन्यजीव प्रेमी मांगीलाल विश्नोई के अनुसार हिरण, नीलगाय, खरगोश और लोमड़ी भोजन की तलाश में आबादी की ओर बढ़ रहे हैं। इनके पीछे शिकारी श्वान और अन्य हिंसक जीव भी पहुंच जाते हैं। बचाव की कोशिश में वन्यजीव अचानक सड़क पार करते हैं और तेज रफ्तार वाहन हादसे का शिकार बन जाते हैं। चाचा, खेतोलाई, गंगाराम की ढाणी, धोलिया, लाठी, सोढ़ाकोर और चांधन क्षेत्र में ऐसी घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

लाठी क्यों बना संवेदनशील कॉरिडोर

लाठी, धोलिया, खेतोलाई, भादरिया, सोढ़ाकोर और पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज के आसपास का इलाका वन्यजीवों का प्रमुख आवास है। वन्यजीवों के पारंपरिक मार्ग कई स्थानों पर हाईवे और ग्रामीण सड़कों को काटते हैं। परिणामस्वरूप सड़कें अब वन्यजीवों और वाहनों के सीधे टकराव का क्षेत्र बनती जा रही हैं।

क्या हो सकते हैं समाधान

• वन्यजीव कॉरिडोर की वैज्ञानिक पहचान और मैपिंग।

• संवेदनशील हिस्सों में स्पीड लिमिट का सख्त पालन।

• चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर और स्मार्ट अलर्ट सिस्टम।

• वन्यजीव अंडरपास और ओवरपास का निर्माण।

• रात के समय गश्त और हाईवे निगरानी बढ़ाना।

• वन क्षेत्रों में जल व चारे की बेहतर उपलब्धता।

-एक्सपर्ट व्यू

यह संकट केवल वन्यजीव संरक्षण का नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा का भी विषय है। समय रहते वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं अपनाया गया तो मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं दोनों में बढ़ोतरी तय है।

-पंकज विश्नोई, पर्यावरण प्रेमी

Published on:
30 Jun 2026 08:03 pm