23 अक्टूबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Jaisalmer: सफेद कोट के पीछे छिपा सेवा और समर्पण का संसार

जब पूरा शहर नींद में होता है, तब जैसलमेर के जवाहिर चिकित्सालय का ट्रॉमा इमरजेंसी वार्ड जीवन बचाने की जंग लड़ रहा होता है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर आधी रात अस्पताल पहुंचे मरीजों के बीच चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने बिना रुके हर आपात स्थिति का तत्परता से सामना किया। यह तस्वीर बताती है कि डॉक्टरों की सेवा घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि मरीजों की जरूरतों से संचालित होती है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जैसलमेर

•

image

Deepak Vyas

•

Updated: 30 Jun 2026, 8:53 PM IST

Group of men in an office

जैसलमेर. जवाहिर चिकित्सालय में मध्यरात्रि के समय मरीजों का उपचार करते चिकित्सक।

जैसलमेर. शहर गहरी नींद में होता है, सडक़ें सुनसान नजर आती हैं और अधिकांश लोग अपने घरों में आराम कर रहे होते हैं। लेकिन इसी समय जिला मुख्यालय स्थित जवाहिर चिकित्सालय के ट्रोमा वार्ड का आपातकालीन वार्ड पूरी तरह सक्रिय रहता है। यहां रात भर मरीजों के आने का सिलसिला जारी रहता है और चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ हर चुनौती का सामना करते हुए मरीजों को राहत पहुंचाने में जुटे रहते हैं। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के उपलक्ष्य में राजस्थान पत्रिका टीम ने आधी रात को जवाहिर चिकित्सालय पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं और चिकित्सकों की कार्यशैली को करीब से देखा। करीब आधी रात के समय अस्पताल की इमरजेंसी में लगातार मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इनमें किसी को आवारा श्वान ने काट लिया तो किसी को सांस में तकलीफ थी। उपचार करवाने आने वालों में करीब 5 वर्षीया बालिका भी थी, जिसे बुखार के लक्षण थे। ऐसे ही लो बीपी के मरीज को लेकर भी परिजन अस्पताल पहुंचे। रात्रि ड्यूटी पर तैनात डॉ. जयप्रकाश बिना किसी विलंब के मरीजों की जांच कर आवश्यक उपचार शुरू करते नजर आए। जरूरत पडऩे पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी संपर्क किया जाता है, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सके।

रात का समय चुनौतीपूर्ण

ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक के अनुसार रात का समय चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान आने वाले मरीजों में कई जने आपात स्थिति में होते हैं। कई बार एक साथ कई गंभीर मरीज पहुंच जाते हैं, ऐसे में प्राथमिकता तय कर तत्काल उपचार देना पड़ता है। इसी तरह से कई बार बहुत सामान्य शारीरिक शिकायत वाले मरीज भी अपनी सुविधा के अनुसार आधी रात और उसके बाद भी किसी समय उपचार के लिए पहुंच जाते हैं। चिकित्सक के अनुसार रात में किसी भी समय स्थिति बदल सकती है, इसलिए पूरी टीम लगातार सतर्क रहती है। मरीजों की जांच, प्राथमिक उपचार, आवश्यक जांचें और जरूरत पडऩे पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी रात जारी रहती है।

अन्य कार्मिक भी रहते हैं मुस्तैद

अस्पताल में कार्यरत नर्सिंगकर्मी, वार्ड बॉय और अन्य कर्मचारी भी चिकित्सकों के साथ कदम से कदम मिलाकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। मरीजों को स्ट्रेचर पर लाना, दवाइयां उपलब्ध कराना, जांच के लिए भेजना और परिजनों को आवश्यक जानकारी देना जैसे कार्य तत्परता से किए जाते हैं। यही समन्वय आपातकालीन सेवाओं को प्रभावी बनाता है। ऐसे में यह भाव बरबस मन में उठता है कि राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस केवल चिकित्सकों को सम्मान देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके उस समर्पण को भी याद करने का दिन है, जिसके कारण वे दिन-रात, त्योहार और छुट्टियों की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं। जब पूरा शहर आराम कर रहा होता है, तब अस्पताल में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी किसी की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में लगे रहते हैं।