
पोकरण (जैसलमेर).भारतीय सेना का पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज एक बार फिर तापों की गर्जना से थर्रा रहा है। भारतीय सेना की ओर से एक बार फिर रैंज में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉविट्जर्स तोपों का परीक्षण शुरू किया है। सेना के तकनीकी अधिकारियों की मौजूदगी में सेना के विशेषज्ञ अधिकारी व जवान अचूक निशाने साधकर हॉविट्जर्स तोप की ताकत का परीक्षण करने में जुटे है। जिससे यहां का फील्ड फायरिंग रेंज बम के धमाकों से थर्रा रहा है। युद्धाभ्यास में तोप की ताकत को परखने के लिए जवान अचूक निशाना साधने के साथ विपरित परस्थिति में इसकी क्षमता की उपयोगिता का भी आंकलन कर रहे है
थार में कर रहे शक्ति प्रदर्शन
।पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉविट्जर्स तोपों का परीक्षण पुनः शुरू हुआ है। गौरतलब है कि परीक्षण के दौरान गोला तोप की नली में ही फट गया था, लेकिन बड़ा हादसा होते-होते बच गया। परीक्षण के दौरान गोला तोप की नली से टुकड़ों में बाहर आकर फटा, जिससे तोप की बैरल को नुकसान पहुुेचा था। दूसरे चरण के अंतर्गत इनडायरेक्ट फायर का परीक्षण जून महीने में शुरू किया गया था, जिसके तहत 30 से 40 किमी दूर बैठे दुश्मन और उसके बड़े हथियार को नेस्तनाबूद करती भारत की ताकत इन तोपों से और भी बढ़ाए जाने की उम्मीद लगाई जा रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार तोप में टुकड़ों में गोले फटने की घटना 2 सितंबर को हुई थी, जिससे तोप की बैरल को नुकसान पहुंचा था।
हादसे के छह माह बाद तोप का परीक्षण पुनः शुरू
गौरतलब है कि हॉविट्जर्स तोपों का वर्ष 2009-10 में परीक्षण किया जा चुका है। वर्ष 2016 में भारत ने अमेरिका से 145 तोपों की खरीद की है, जिनमें से दो तोपें 18 मई को भारत पहुंची थी। पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में तोपों को लाने के बाद इनका परीक्षण 8 जून को शुरू किया गया। इन तोपों का फायरिंग टेस्ट पास हो चुका है। परीक्षण के दौरान इनकी फायरिंग टेबल बनाई जा रही है। वर्ष 2018 में तीन और तोपें भारत को प्राप्त होगी तथा शेष तोपें 2019-20 में प्राप्त होने पर इन्हें भारतीय सेना को सुपुर्द किया जाएगा।
यूं करती है कार्य
-प्रत्यक्ष तौर पर ये तोपें चार किमी तक वार करती है।
-अप्रत्यक्ष तौर पर ये तोपें 30 से 40 किमी तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की ताकत रखती है।-ये तोपें एक मिनट में चार राउण्ड निकालती है।