पशुपालन बाहुल्य वाले जैसलमेर जिले में गोवंश पर एक बार फिर कर्रा रोग का जानलेवा संकट मंडरा रहा है और प्रशासन के अपने आंकड़े के अनुसार अब तक करीब 200 गोवंश की जान इस बीमारी ने ले ली है।
पशुपालन बाहुल्य वाले जैसलमेर जिले में गोवंश पर एक बार फिर कर्रा रोग का जानलेवा संकट मंडरा रहा है और प्रशासन के अपने आंकड़े के अनुसार अब तक करीब 200 गोवंश की जान इस बीमारी ने ले ली है। वहीं गैरसरकारी आंकड़ा इससे ज्यादा का ही है। बीमारी से संक्रमित पशु की हड्डी या चमड़ी चाटने से दूसरे पशु तक पहुंचने वाले इस रोग से बचाव के लिए जिला प्रशासन की तरफ से निगरानी रखी जा रही है। बीते दिनों पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने जैसलमेर का दौरा कर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। दूसरी तरफ जिला प्रशासन की ओर से प्रशासन के आला अधिकारियों से लेकर ग्राम पंचायतों के सरपंचों तक को कर्रा के फैलाव को रोकने के लिए बनाए सिस्टम में शामिल किया है। दूसरी ओर पदों की मार से त्रस्त पशुपालन विभाग की ओर से सीमित साधनों से बेहतरीन काम करने का दावा किया जा रहा है। फिर भी इस बीमारी से गोवंश को उनके पालकों की जागरुकता ही बचा सकती है।