आगरा

रमजान में रेगिस्तान में महकेगी 220 टन खजूर

-बाड़मेर, जोधपुर, गंगानगर, नागौर के साथ अन्य जिलों में भी बिखर रही मिठास-अरब के खजूर को रास आया जैसाणा, अब बिकने का इंतजार

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Jun 07, 2017
dates in the jaisalmer desert
जैसलमेर.अरब के रेगिस्तान की मिठास अब पश्चिमी राजस्थान में भी घुलने लगी है। अरब देशो व रेगिस्तान की जलवायु समान होने से टिश्यू कल्चर पद्धति से तैयार खजूर की मिठास राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, गंगानगर, नागौर के साथ अन्य जिलों में भी फैलने लगी है। जैसलमेर जिले के सगरा भोजका में लगाए गए खजूर के उद्यान में टिश्यू कल्चर के पौधे अब उत्पादन देने लगे है। रमजान के महिने में खजूर की पैदावार पककर तैयार होने से रोजेदारों को सस्ते दामों पर खजूर उपलब्ध हो सकेगा, वहीं टेण्डर प्रक्रिया होने के बाद जैसलमेर से हजारों टन खजूर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपनी मिठास बिखेरेगी। जानकारों की माने तो इस साल मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बाद भी सगरा भोजका के सरकारी फार्म हाउस में 220 टन खजूर का उत्पादन होने की उम्मीद है। उनके अनुसार यहां करीब चार किस्म की खजूर का उत्पादन वर्तमान में हो रहा है, जिसकी बाजार में मांग बहुत अधिक होने से तुड़ाई का ठेका लेने वाला ठेकेदार बड़ा मुनाफा कमा रहा है।
थार के रेगिस्तान में पनप रहा खजूर
अरब का खजूर इजरायल पद्धति से अब थार के रेगिस्तान में भी आसानी से मुहैया हो रही है। पश्चिमी राजस्थन की जलवायु खजूर की खेती के लिए उपयुक्त होने से उत्तक संवर्धित तकनीक से स्थानीय जलवायु की परिस्थितियों में खजूर की खेती फल-फूल रही है। राजस्थान की जलवायु खजूर के लिए उपयुक्त होने से अब किसानों को खजूर के उद्यान लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कई किसानों ने जैसलमेर के खजूर के उद्यान को देखने के बाद खजूर की खेती को अपनाया है और पैदावार भी लेने लगे है। जैसलमेर में वर्ष 2014 से खजूर का उत्पादन ले रहा है। लगातार ये चौथा साल है, जब यहां खजूर का उत्पादन बाजार में बिक्री के लिए भी जा रहा है।
ऑफ सीजन में कमाई का जरिया
जानकारो की माने तो खरीफ व रबी की ऑफ सीजन में खजूर किसानों की आय का जरिया बना हुआ है। रबी की फसल मार्च में पकने के बाद जुलाई तक पांच महिने खेतो में सन्नाटा रहता है, लेकिन खजूर की पैदावार कर किसान ऑफ सीजन मई व जून में भी आय ले सकता है।
इतनी हो रही पैदावार
जानकारों की माने तो खूजर का टिश्यू कल्चर का पौधा चार साल बाद उत्पादन शुरू हो जाता है। शुरूआती वर्ष में 40 किलो प्रति पौधा उत्पादन दे रहा है, वहीं तीन साल बाद अस्सी से सौ किलो प्रति पौधा उत्पादन देने लगता है।
पानी की नहीं अधिक आवश्यकता
विशेषज्ञों के अनुसार खजूर पौधे को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे में ये जैसलमेर-बाड़मेर जैसे क्षेत्रो के किसानों के लिए खजूर की खेती काफी कारगर साबित होती है। कम पानी में अच्छी पैदावार होने से किसानों के लिए खजूर लाभप्रद साबित हो सकता है।
ये है उत्पादन की प्रक्रिया
जानकारों के अनुसार विपरीत परिस्थितियों का खजूर की खेती पर कोई असर नहीं पड़ता है। एक हैक्टेयर जमीन में खजूर के 156 पौधे लगाए जा सकेंगे। इनमें 151 पौधे मादा लगाए जाते हैं और 5 पौधे नर होते हैं। फल केवल मादा पौधों से ही होते हैं। खजूर के पौधों में हर चौथे वर्ष में फल उत्पादन शुरू होता है। जैसलमेर के सगरा भोजका स्थित खजूर के सरकारी उद्यान में इस साल २२० टन खजूर का उत्पादन होने का अनुमान है। जानकारो के अनुसार इस वर्ष 11 हजार 800 पौधों से पौधे उत्पादन मिलेगा।
फैक्ट फाइल
- 100 हेक्टेयर में जैसलमेर के भोजका में लगा है खजूर का उद्यान।
- 15,200 खजूर के पौधे वर्तमान में लगे है सरकारी उद्यान में
- 11,800 पौधों से इस साल मिलेगी पैदावार
- 220 टन खजूर का इस साल होगा उत्पादन
- १७४ टन का गत साल हुआ था उद्यान में उत्पादन
हो रहा निर्यात
जैसलमेर में तैयार खजूर जैसलमेर के साथ प्रदेश व बाहरी राज्यों में भी निर्यात किया जा रहा है। किसानों का खजूर के प्रति रुझान कम होने से जैसलमेर सहित प्रदेश के किसान अभी तक खजूर की खेती में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।

देरी से शुरू होगी तुड़ाई
खजूर का उत्पादन गत साल की तुलना में अधिक रहेगा। मौसम की परिस्थितिया अनुकूल रहने से इस बाद खजूर की अच्छी पैदावार होगी। खजूर की तुड़ाई की प्रक्रिया सामान्य से देरी होगी। मौसमी परिस्थितियों के कारण खजूर तुड़ाई की प्रक्रिया करीब दस दिन देरी से शुरू की जाएगी।
- दुर्गालाल मौर्य, उप निदेशक खजूर उद्यान, जैसलमेर
Published on:
07 Jun 2017 09:36 am
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