अच्छी बारिश होने से ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध काष्त की समस्या और विकट हो गई है। हजारों बीघा क्षेत्र में अवैध काश्त का यह गोरखधंधा न केवल बारानी जमीन और नहरी क्षेत्र में चल रहा है बल्कि ओरण व गोचर भूमि को भी नहीं बख्शा जा रहा है। अवैध काष्त की बढ़ती समस्या के चलते गांवों में सामाजिक ताने-बाने को भी चोट पहुंच रही है और कई विवाद मारपीट की हद तक जा पहुंचे हैं। आपस में शिकायतों का दौर भी चरम पर पहुंच गया है।
जिले में अवैध काष्त की समस्या प्रमुख तौर पर
व फतेहगढ़ तहसील क्षेत्रों में ज्यादा है क्योंकि यहां सरकारी जमीन का विशाल लैंड बैंक है, जबकि जिले की पोकरण व भणियाणा तहसीलों में सिवायचक जमीन बहुत कम होने से वहां यह समस्या उतनी विकट नहीं है।
ग्रामीण व नहरी क्षेत्रों में इस बार
अच्छी बारिष होने के बाद जगह-जगह पानी भर गया और जमीन पर्याप्त रूप से खेती लायक बन चुकी है। इसके चलते अपने अधिकार से बाहर निकलकर सरकारी या किसी अन्य व्यक्ति की जमीन पर खेती करने का लोभ बड़े पैमाने पर जाग चुका है। बीते अर्से के दौरान प्रषासन के निर्देषानुसार जिले की सभी राजस्व व उपनिवेशन तहसीलों में अवैध काश्त के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। प्रशासन ने इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को बाकायदा लक्ष्य आबंटित किए हैं। मंगलवार को चक 1 जीडीएम 8 के मुरब्बों पर अवैध काष्त को नष्ट करवाया गया। यह कार्रवाई उपनिवेशन विभाग ने की। ग्रामीण क्षेत्रों में दबंग किस्म के लोगों की तरफ से बड़े पैमाने पर अवैध काश्त किया जाना कतई नई घटना नहीं है। सरकारी तंत्र की ओर से बीच-बीच में छुटपुट कार्रवाइयों के अलावा उन पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिशें कम ही गई हैं। इस बार जिला प्रषासन ने अवैध काष्त के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाने के इरादे जाहिर किए हैं।
जिले के सभी तहसील क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर किसानी करने वालों की बड़ी तादाद है। एक तरफ अवैध काश्त सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है, वहीं यह भी एक सच्चाई है कि, जिले के किसानों को बीते करीब चार दशकों से बारानी भूमि का आबंटन नहीं किया गया है। इस दौरान विशाल भू-भाग वाले
जिले में जमीन का आबंटन पिछले डेढ़ दशक के दौरान निजी कंपनियों को पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने या अन्य उद्देश्य से किए गए हैं। एक तरफ निजी कंपनियों को सरकार के निर्देशानुसार
जिले में उदारता से जमीन बेची गई, दूसरी ओर जिले के मूल निवासी किसान व पशुपालक बारानी भूमि के आबंटन का इंतजार ही कर रहे हैं। विगत दो दशक में सरकार ने केवल नहरी क्षेत्र में जमीन आबंटित की। आज भी उपनिवेशन क्षेत्र में भूमि आबंटन के कोई 65 हजार आवेदन पत्र सरकारी बस्तों में कैद हैं।
फैक्ट फाइल -
-01 लाख बीघा क्षेत्र में हो सकती है अवैध काश्त
-38 हजार वर्ग किमी में फैला है जैसलमेर />-04 तहसीलें हैं जैसलमेर में
-02 तहसीलों में अवैध काश्त की समस्या विकट
लगातार जारी रहेगा अभियान
जिले में अवैध काश्त के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान निरंतर जारी रहेगा, जिसमें किसी तरह की कोताही नहीं करने दी जाएगी। बारानी भूमि का आबंटन नहीं होना, अलग विषय है। इसे अवैध काष्त से जोड़ा नहीं जा सकता।
-कैलाषचंद मीना, जिला कलक्टर जैसलमेर/p>
शरणार्थी हो जाएंगे जिलावासी
जैसलमेर जिले की जमीन का आबंटन जिलावासियों को नहीं कर सरकार निजी कंपनियों को कर रही है। इसके अलावा सेना को फायरिंग रेंज के नाम पर सैकड़ों वर्ग किलोमीटर जमीन सौंपी जा चुकी है। आने वाले समय में यहां के बाशिंदे शरणार्थी बनने पर भी विवश हो सकते हैं। प्रत्येक भूमिहीन वयस्क को न्यूनतम 35 बीघा जमीन आबंटित की जाए और वरीयता मूल ग्रामवासी को मिले।बारानी आबंटन नहीं होने से अवैध काष्त की समस्या बढ़ रही है।
-प्रेमसिंह परिहार, मुख्य संयोजक, जिला किसान संघर्ष समिति, जैसलमेर/strong>