
जैसलमेर. 14 अक्टूबर 2025 की दोपहर...। जैसलमेर से जोधपुर जा रही एसी स्लीपर बस थैयात गांव के पास आग की चपेट में आ गई। कुछ ही पलों में यह सफर जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में बदल गया। हादसे में कुल 29 लोगों की मौत हुई। पीछे छूट गए जले हुए अवशेष, उजड़े परिवार और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े ऐसे सवाल... जिनका जवाब हादसे की बरसी पर भी जरूरी है। राज्य की विधि विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल की जांच में आग की तकनीकी वजह सामने आई, लेकिन हकीकत यह है कि आपातकाल में बस में निकासी व्यवस्था न होने की स्थिति ने त्रासदी की गंभीरता को और उजागर किया। बस का मुख्य दरवाजा और दोनों इमरजेंसी गेट बंद थे।
सफर की शुरुआत: 14 अक्टूबर 2025 को निजी बस जैसलमेर से जोधपुर के लिए रवाना हुई। यात्री अपनी मंजिल तक पहुंचने की उम्मीद में सफर कर रहे थे।
आग की शुरुआत: दोपहर करीब 3:30 बजे थैयात गांव के पास बस में आग लगी। एफएसएल जांच में छत पर लगे एयर कंडीशनर (एसी) की वायरिंग में शॉर्ट सर्किट को आग का कारण बताया गया।
लपटों का फैलाव: आग लगने के समय बस चल रही थी। लपटें आगे से पीछे की ओर फैलीं।
मिला कम समय: बस के पिछले हिस्से से धुआं उठने लगा। आग तेजी से फैली और यात्रियों को बाहर निकलने के लिए बहुत कम समय मिला।
बचाव की चुनौती: आग के दौरान मुख्य दरवाजा और दोनों इमरजेंसी गेट बंद पाए गए।
- स्थानीय प्रशासन और सेना की मदद से बचाव कार्य हुआ। घायलों को पहले जैसलमेर और फिर जोधपुर के अस्पतालों में पहुंचाया गया।
सबसे ज्यादा नुकसान: एसी के ठीक नीचे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ। पिछले हिस्से में जनहानि अधिक हुई।
जांच और खुलासे: एफएसएल ने वायरिंग और जली बस की जांच की। एसी के वेंट में लगी चारों आउटर यूनिट पूरी तरह जलकर क्षतिग्रस्त मिलीं।
-गंभीर रूप से जले शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूने लिए गए। बस मालिक, चालक और बस की बॉडी निर्माता के खिलाफ मामला दर्ज हुआ तथा जांच शुरू हुई।
एफएसएल के अनुसार बस की छत के बीचोंबीच लगे एसी की वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ। संबंधित तार बस के मध्य हिस्से से पीछे तक जाता था। एसी के वेंट में लगी चारों आउटर यूनिट बुरी तरह जल गईं। एसी के ठीक नीचे सबसे अधिक क्षति हुई। बस के चलने के दौरान आग आगे से पीछे की ओर फैली और पिछले हिस्से में जनहानि ज्यादा हुई।
वाहन सुरक्षा के सामान्य सिद्धांतों के अनुसार सुरक्षित वायरिंग, आग की शुरुआती पहचान, प्रभावी अग्निशमन उपकरण और आसानी से खुलने वाले इमरजेंसी गेट जान बचाने में अहम हैं। केवल निकास द्वार होना ही काफी नहीं हैं, संकट में उसका खुलना और उस तक पहुंच संभव होना भी जरूरी है।