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jaisalmer: तनोट माता मंदिर में घट स्थापना के साथ दस दिवसीय नवरात्र मेले का आगाज

भारत-पाक सीमा के निकट स्थित तनोट माता मंदिर में घट स्थापना के साथ 10 दिवसीय नवरात्र मेले का शुभारंभ हुआ। पहले दिन देश के विभिन्न हिस्सों से 20 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और माता के दर्शन कर सुख-शांति की कामना की। ढोल-नगाड़ों के बीच शोभायात्रा, हवन-यज्ञ और आरती के साथ मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू हुआ।
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tanot mata mandir jaisalmer news

तनोट माता मंदिर में नवरात्र के पहले दिन हवन-यज्ञ में आहुतियां अर्पित करते बीएसएफ के अधिकारी।

जैसलमेर। भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित करीब 1200 वर्ष पुराने प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर में रविवार को घट स्थापना के साथ नवरात्र मेले का शुभारंभ हुआ। जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में पहले दिन देश के विभिन्न हिस्सों से 20 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और माता के दर्शन कर सुख-शांति की कामना की। नवरात्र के पहले दिन ढोल-नगाड़ों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद मंदिर परिसर में हवन-यज्ञ हुआ, जिसमें बीएसएफ की 26वीं बटालियन के कमांडेंट लिन्जकाई सितलऊ सहित अधिकारियों और जवानों ने आहुतियां अर्पित कीं। द्वितीय कमान अधिकारी मदन गोयल और दीपांकर शर्मा, डिप्टी कमांडेंट अनमोल भगत तथा सुशील कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। हवन के बाद श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया।

मंदिर में प्रतिदिन तीन आरतियों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए सुबह से शाम तक भंडारे की व्यवस्था भी की गई है। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाकर रोशनी से जगमग किया गया है। भीड़ के दौरान श्रद्धालु आसानी से दर्शन और आरती देख सकें, इसके लिए बाहर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गई है।

भोजन, चिकित्सा और सुरक्षा के इंतजाम

बीएसएफ राजस्थान फ्रंटियर के आइजी के मार्गदर्शन और बीएसएफ सेक्टर नॉर्थ के डीआइजी जितेंद्र सिंह बिंजी के निर्देशन में 26वीं बटालियन श्रद्धालुओं की सुविधाओं का प्रबंधन कर रही है। मंदिर में चिकित्सा शिविर लगाया गया है। बीएसएफ जवान पूजा-अर्चना और मंदिर की देखरेख के साथ भोजन सहित अन्य व्यवस्थाएं भी संभाल रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्र और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए बीएसएफ तथा पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। मंदिर के आसपास दुकानें भी लगाई गई हैं। कई श्रद्धालु पैदल यात्रा कर माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

युद्धकालीन मान्यताओं से जुड़ी आस्था

तनोट माता मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं और सुरक्षा बलों की गहरी आस्था का संबंध वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों से जुड़ी मान्यताओं से है। मान्यता है कि युद्ध के दौरान मंदिर क्षेत्र में सैकड़ों बम दागे गए, लेकिन कोई भी मंदिर परिसर में नहीं फटा। इस मान्यता ने सीमा क्षेत्र के ग्रामीणों और जवानों की श्रद्धा को मजबूत किया। वर्ष 1965 के युद्ध के बाद सेना और बीएसएफ ने मंदिर के विकास और देखरेख में विशेष भूमिका निभाई।

नवरात्र के अवसर पर निकटवर्ती घंटियाली माता मंदिर में भी घट स्थापना की गई। यहां श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां अर्पित कर पूजा-अर्चना की।