जैसलमेर

जैसलमेर: स्कूल टाइम बना विद्यार्थियों के लिए हर दिन ‘हीट ट्रायल’

भीषण गर्मी के दौर में शहर के स्कूलों का वर्तमान समय विद्यार्थियों के लिए किसी ‘हीट ट्रायल’ से कम नहीं रह गया है। तापमान लगातार 46 डिग्री के पार पहुंचने से हालात ऐसे बन गए हैं कि छोटे बच्चों को तो आंशिक राहत मिल गई है, लेकिन कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी अब भी झुलसती गर्मी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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Apr 27, 2026
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भीषण गर्मी के दौर में शहर के स्कूलों का वर्तमान समय विद्यार्थियों के लिए किसी ‘हीट ट्रायल’ से कम नहीं रह गया है। तापमान लगातार 46 डिग्री के पार पहुंचने से हालात ऐसे बन गए हैं कि छोटे बच्चों को तो आंशिक राहत मिल गई है, लेकिन कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी अब भी झुलसती गर्मी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। दोपहर के समय स्कूलों में बैठना उनके लिए कठिन परीक्षा बन चुका है। स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं का समय सुबह जल्दी कर दिया गया है, जिससे छोटे बच्चों को तेज धूप और लू से कुछ हद तक बचाव मिल रहा है। इसके विपरीत उच्च कक्षाओं यानी कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों का समय यथावत रहने से वे दिन के सबसे गर्म हिस्से में कक्षाओं में बैठने को विवश हैं। इस कारण उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर साफ दिखाई देने लगा है।

स्कूलों के कक्षाकक्ष इन दिनों हीट चैंबर जैसे महसूस हो रहे हैं। पर्याप्त वेंटिलेशन और ठंडक की व्यवस्था नहीं होने से बच्चे घुटन और अत्यधिक गर्मी का सामना कर रहे हैं। कई स्कूलों में पंखे और कूलर भी तेज गर्मी के आगे बेअसर साबित हो रहे हैं।परिणामस्वरूप चक्कर आना, सिरदर्द, थकान और बेहोशी जैसे मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। कुछ विद्यार्थियों को बीच कक्षा से ही बाहर ले जाकर प्राथमिक उपचार देना पड़ रहा है।शहर में बढ़ती गर्मी और लगातार सामने आ रहे स्वास्थ्य संबंधी मामलों के बीच अब यह मांग तेज हो गई है कि सभी कक्षाओं के स्कूल समय को एक समान सुबह के सत्र में परिवर्तित किया जाए। अभिभावकों, विद्यार्थियों और स्कूल प्रबंधन की ओर से प्रशासन से शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा की जा रही है, ताकि बच्चों को इस ‘हीट ट्रायल’ से राहत मिल सके।

स्कूल प्रबंधन भी असहज, अभिभावक चिंतित

स्कूल प्रबंधन भी इस स्थिति को लेकर असहज नजर आ रहा है। शिक्षकों के सामने पढ़ाई जारी रखना और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक साथ चुनौती बन गया है। कई स्कूलों में पानी की पर्याप्त व्यवस्था और ब्रेक बढ़ाने जैसे उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हो रही है।

अभिभावकों में भी चिंता गहराने लगी है। उनका कहना है कि भीषण गर्मी में बच्चों का स्वास्थ्य प्राथमिकता होनी चाहिए और समय में तत्काल बदलाव आवश्यक है। अभिभावक राजेश शर्मा ने कहा कि सुबह के समय पढ़ाई हो तो बच्चे सुरक्षित रहते हैं, लेकिन दोपहर में उन्हें भेजना जोखिम भरा लग रहा है। सरकार को सभी कक्षाओं का समय एक समान रूप से सुबह करना चाहिए। एक अन्य अभिभावक सीमा व्यास का कहना है कि बच्चे घर लौटते समय पूरी तरह थक जाते हैं। कई बार सिरदर्द और उल्टी की शिकायत भी करते हैं, यह स्थिति चिंताजनक है।

विद्यार्थियों की पीड़ा - पढ़ाई करें या पसीना पोंछे

कक्षा 10 के छात्र राहुल ने बताया कि कक्षा में बैठना मुश्किल हो जाता है, पसीना लगातार आता रहता है और ध्यान पढ़ाई पर नहीं लग पाता। वहीं कक्षा 11 की छात्रा प्रिया ने कहा कि दोपहर की गर्मी में बाहर निकलना ही कठिन होता है, स्कूल में कई बार चक्कर जैसा महसूस होता है। चिकित्सकों के अनुसार अत्यधिक तापमान में लंबे समय तक बंद कक्षाओं में बैठना बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे हीट एग्जॉशन और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समय में बदलाव और ठंडक की समुचित व्यवस्था जरूरी मानी जा रही है।

Updated on:
27 Apr 2026 08:27 pm
Published on:
27 Apr 2026 08:27 pm