जैसलमेर

रेत से हरियाली तक…पर्यावरण सेना ने बदली थार की तस्वीर, दो करोड़ से अधिक पौधों ने रेगिस्तान को दी नई पहचान

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लगाए गए पौधों की जीवितता दर 82 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है, जो मरुस्थलीय परिस्थितियों में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार थार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण का प्रभाव केवल हरियाली तक सीमित नहीं रहता।

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Jun 04, 2026
mohangarh news photo
ईटीएफ ने लगाए पौधे

कभी जहां दूर-दूर तक केवल रेत, धोरों और बंजर विस्तार का दृश्य दिखाई देता था, वहीं आज हरियाली की लंबी पट्टियां थार के बदलते भू-दृश्य की कहानी कह रही हैं। जैसलमेर के रेगिस्तानी भूभाग में यह बदलाव किसी प्राकृतिक संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि लगभग तीन दशकों से जारी सुनियोजित पर्यावरणीय प्रयासों का असर है। इस परिवर्तन के केंद्र में मोहनगढ़ स्थित 128वीं पैदल वाहिनी (प्रादेशिक सेना) पर्यावरण राज रिफ है, जिसने रेगिस्तान को हरित परिदृश्य में बदलने की अनूठी मिसाल पेश की है। वर्ष 1997 से अब तक बटालियन ने 23,289 हेक्टेयर भूमि पर 2 करोड़ 12 लाख 31 हजार से अधिक पौधे लगाए हैं। यह क्षेत्रफल कई छोटे शहरों के कुल क्षेत्रफल से भी बड़ा है।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लगाए गए पौधों की जीवितता दर 82 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है, जो मरुस्थलीय परिस्थितियों में राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार थार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पौधरोपण का प्रभाव केवल हरियाली तक सीमित नहीं रहता। इससे स्थानीय तापीय संतुलन, मृदा संरक्षण, कार्बन अवशोषण, जैव विविधता और भूजल संरक्षण को भी दीर्घकालिक लाभ मिलता है। यदि पौधों की जीवितता दर 82 प्रतिशत से ऊपर बनी रहती है, तो यह मॉडल देश के अन्य शुष्क क्षेत्रों के लिए भी अध्ययन का विषय बन सकता है।

मुख्य आंकड़े

- 23,289 हेक्टेयर भूमि हरित विकास दायरे में

- 2.12 करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए

-82 प्रतिशत से ज्यादा पौधों की जीवितता

- तीन अलग-अलग कंपनियां अलग क्षेत्रों में सक्रिय

-22 सितंबर 2024 को एक घंटे में 5,19,130 पौधे रोपे गए

- एक साथ चार विश्व रिकॉर्ड दर्ज

कोरोना भी नहीं रोक पाया हरियाली मिशन

जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था, तब भी पौधरोपण और संरक्षण कार्यों की गति बनी रही। विपरीत मौसम, जल संकट, तेज आंधियां और अत्यधिक तापमान जैसी चुनौतियों के बीच जवानों ने पौधों की देखभाल और नए रोपण कार्य को जारी रखा। यही कारण है कि आज मोहनगढ़ और आसपास के कई हिस्सों में हरित पट्टियां स्पष्ट दिखाई देती हैं।

तीन मोर्चों पर काम, एक लक्ष्य—हरा थार

कमान अधिकारी कर्नल मनोजीत ठाकोरे के अनुसार बटालियन की तीन कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

-ए कंपनी : पनोधर राय मंदिर क्षेत्र, मोहनगढ़

-बी कंपनी : जैसलमेर मिलिट्री स्टेशन क्षेत्र

- सी कंपनी : राष्ट्रीय मरु उद्यान, सम क्षेत्र

विश्व रिकॉर्ड ने बढ़ाई पहचान

सी कंपनी पौधरोपण के साथ सेवण घास संवर्धन, गोडावण संरक्षण और अन्य वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। 22 सितंबर 2024 को जिला प्रशासन और आमजन की सहभागिता से केवल एक घंटे में 5,19,130 पौधे लगाए गए। अभियान ने चार विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर राष्ट्रीय स्तर पर जैसलमेर और मोहनगढ़ मॉडल को नई पहचान दिलाई।

जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को भी प्राथमिकता

- जल चेतना यात्राएं

- ग्रामीणों को पौधे वितरित

- जल संरक्षण तकनीकों की जानकारी

- विद्यालयों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम

-युवाओं को सेना भर्ती संबंधी मार्गदर्शन

-चिकित्सा शिविरों में निःशुल्क जांच और दवा वितरण किया जाता है

सम्मानों की लंबी सूची

बटालियन के कार्यों को समय-समय पर अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इनमें इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार, निसर्ग मित्र पुरस्कार, महाराणा उदय सिंह मेवाड़ पुरस्कार, महारानी मरूधर कंवर पुरस्कार, इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार, जेएसडब्ल्यू-टाइम्स ऑफ इंडिया अर्थ केयर अवार्ड, फतेह सिंह राठौड़ वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन अवार्ड, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन सम्मान तथा सीओएएस एप्रिसिएशन 2025 जैसे सम्मान शामिल हैं।

Published on:
04 Jun 2026 08:08 pm