लक्ष्मीनाथ पशुमेला आयोजन समिति की ओर से जैसलमेर मेंं लाणेला के रण में 1 नवम्बर को घुड़दौड़ का आयोजन होगा।
जैसलमेर. लक्ष्मीनाथ पशुमेला आयोजन समिति की ओर से जैसलमेर मेंं लाणेला के रण में 1 नवम्बर को घुड़दौड़ का आयोजन होगा। समिति की ओर से अपने स्तर पर आयोजित अनूठी घुड़दौड़ में भाग लेने सैकड़ों घोड़े पहुंचेंगे। यहां टाकी घोड़ा भी आकर्षक का केन्द्र रहेगा । आयोजन में चार प्रकार की अलग-अलग घुड़दौड़, बड़ी रेवाल, छोटी रेवाल, चोबाल या माधरी और गैलप का आयोजन किया जाएगा। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर आने वाले घुड़सवारों को पुरस्कृत भी किया जाएगा । घुड़दौड़ के लिए जैसलमेर में दूर तक फैला यह लाणेला का रण लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। पशु मेले में जैसलमेर के अलावा लगभग 18 शहरों बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, फलोदी, जालोर, सूरत, भीनमाल, सिणधरी, तिलवाड़ा, फैजाबादए कच्छ भुजए नोसेरीए नारोलीए सायणए अहमदाबाद ओर गांगन से भी घुड़सवार घोड़ों के साथ भाग लेने जैसलमेर आना शुरू हो गए है। इस घुड़दौड़ में लगभग 500 से 600 घोड़े भाग्य आजमाएंगे। रविवार से ही इस घुड़दौड़ में भाग लेने के लिए घुड़सवार अपने घोड़ों के साथ पहुंचना स्टार्ट हो गए है । रात्रि में मंगनिहारों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था भी रखी गई है ।
विचार क्रांति रथ घूमा शहर, एकत्रित की सामग्री
जैसलमेर. आओ गौ माता बचाए महाभियान के क्रम में गोपा चौक से विचार क्रांति रथ निकाला गया। सुबह 8 बजे रवाना होकर ढिब्बा पाड़ा, डांगरा पाड़ा, गून्दी पाड़ा बिसानी पाड़ा, चाचा पाड़ा होते हुए पालीवाल मिष्टान भंडार से आचार्य पाड़ा, मजदूर पाड़ा, सुथार पाड़ा, संग्रहण केन्द्र, सार्वजनिक मंदिर परिसर, शिव मार्ग व गांधी कॉलोनी पहुंचा। रथ का विभिन्न मोहल्ले वासियों की ओर से पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। नगरवासियों की ओर से पुरानी साड़ी व अखबार दान में दिए गए कार्यकर्ताओं की ओर से युग साहित्य वितरित किया गया। पॉलीथिन की जगह कपड़े के थैले का उपयोग करने का आग्रह किया गया। महाभियान को अन्य स्थानों तक पहुचाने के लिए कार्यकत्ता भगवानदास खत्री की ओर रामदेवरा, फलौदी, ओसियां, हुण गांव, सतलाना, बारसा एवं पाली पहुंचकर मुद्रित सामग्री वितरित की गई और वहां के लोगों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम में भगवानदास खत्री, थिरपाल गर्ग, रमण सोनी, हुकमसिंह, गिरिराज पुरोहित, महेंद्रसिंह, छगनराम, रजनीश, नवीन केला, चन्द्रशेखर आचार्य, जय प्रकाश व्यास आदि ने सहयोग दिया। कार्यक्रम संयोजक गायत्री परिवार के महेश गंगन ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।