
सीमांत जैसलमेर जिले में वन्यजीवों की प्रतिवर्ष होने वाली गणना शुक्रवार को वैशाख माह की पूर्णिमा के मौके पर होगी। इसके लिए शाम 5 बजे से अगले दिन शनिवार को शाम 5 बजे तक कुल 264 कार्मिक 24 घंटे निगरानी रखेंगे और अत्याधुनिक उपकरणों से चिन्हित किए गए 80 जलस्रोतों पर आने वाले प्रत्येक वन्यजीव का हिसाब रखेंगे। गौरतलब है कि वैशाख पूर्णिमा के मौके पर चंद्रमा जबर्दस्त ढंग से प्रकाशमान होता है और वर्तमान में चल रही भीषण गर्मी में माना जाता है कि जंगलों में विचरण करने वाला प्रत्येक वन्यजीव 24 घंटे में कम से कम एक बार प्यास बुझाने अवश्य जलस्रोत पर आएगा।
यह गणना राष्ट्रीय मरु उद्यान (डीएनपी) और मरु विकास कार्यक्रम (डीडीपी) के तहत जैसलमेर से बाड़मेर तक फैले वन्य क्षेत्रों में होगी। 24 घंटे तक चलने वाले इस अभियान में विभाग तकनीक के साथ परंपरागत तरीकों से भी गणना करेंगे। जानकारी के अनुसार वन्यजीवों की गणना के लिए कुल 80 वाटर होल्स (पानी के गड्ढे) चिन्हित किए गए हैं। विभागीय कार्मिक शुक्रवार से शनिवार तक बिना सोए 24 घंटे मचानों पर मुस्तैद रहेंगे।
विभागीय जानकारी के अनुसार जैसलमेर, म्याजलार, बाड़मेर और पोकरण रेंज के 52 पॉइंट्स पर इकोलॉजिकल टास्क फोर्स के जवान और भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक भी मचानों पर डटे रहेंगे। प्रत्येक वाटर होल पर एक तकनीकी कर्मचारी के साथ एक स्थानीय अनुभवी ग्रामीण गणक को तैनात किया गया है। इससे वन्यजीवों की पदचाप और उनकी प्रजाति की पहचान सटीक हो सकेगी। पहली बार मुख्य लोकेशंस पर कैमरा ट्रैप्स लगाए गए हैं। रात के अंधेरे में भी अगर कोई जीव पानी पीने के लिए आवाजाही करेंगे तो सेंसर की मदद से स्वत: उनकी फोटो खिंच जाएगी। गौरतलब है कि गत वर्ष वन्यजीवों की गणना में 3245 चिंकारा, 862 मरुस्थलीय लोमड़ी, 118 मरुस्थलीय बिल्ली, 1100 से ज्यादा नील गाय पाई गई थी।
रामदेवरा क्षेत्र के समीप लोहारकी गांव से पांच किलोमीटर दूर मांगलिया की ढाणी के पास अज्ञात वाहन की टक्कर से एक हिरण घायल हो गया। घटना के बाद आसपास की ढाणी में रहने वाले ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायल हिरण का प्राथमिक उपचार किया। जानकारी के अनुसार लोहारकी गांव के पास घायल अवस्था में मिले हिरण को सिकंदर खान के परिवार ने संभाला और उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घटना की सूचना स्थानीय जीव प्रेमी धर्मेंद्र बिश्नोई को दी गई। इसके बाद धर्मेंद्र पूनिया मौके पर पहुंचे और वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल हिरण का रेस्क्यू किया। टीम हिरण को उपचार के लिए अपने साथ ले गई। समय पर मिली सहायता से वन्यजीव की जान बच सकी।
Updated on:
30 Apr 2026 09:02 pm
Published on:
30 Apr 2026 08:53 pm
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