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Jaisalmer: तस्वीर बदलने वाली योजना पर सुस्ती भारी…196 करोड़ की नई पाइप लाइन पर महीनों बाद कार्य शुरू नहीं

रेगिस्तानी जिले जैसलमेर की पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए घोषित करीब 196 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी पाइपलाइन परियोजना बजट घोषणा के महीनों बाद भी कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी है। मोहनगढ़ से गजरूप सागर तक प्रस्तावित 58 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के लिए अब तक डीपीआर भी तैयार नहीं हो पाई है। विभागीय स्तर पर कार्य एजेंसी तय नहीं होने से परियोजना की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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जैसलमेर जिले का मोहगनढ़ ​िस्थ्त हेडवर्क्स।

जैसलमेर. रेगिस्तान में पानी किसी वरदान से कम नहीं है। ऐसे में जैसलमेर शहर और जिले के सैकड़ों गांवों की पेयजल व्यवस्था को नई मजबूती देने वाली करीब 196 करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी परियोजना पर उच्च स्तर से सुस्ती हावी नजर आ रही है। राजस्थान सरकार के पिछले आम बजट में घोषित इस योजना के तहत मोहनगढ़ स्थित बाड़मेर लिफ्ट परियोजना से जैसलमेर के समीप गजरूप सागर तक करीब 58 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाई जानी है, लेकिन बजट घोषणा के बाद महीनों भी अब तक काम की डीपीआर (विस्तृत कार्य योजना) तक नहीं बन पाई है। जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग के मुख्यालय स्तर पर अभी तक यह भी तय नहीं हो पाया है कि करीब 196 करोड़ की लागत वाला कार्य विभाग की कौनसी विंग करवाएगी।

नहरी जल पर आश्रित जैसलमेर

मरुस्थलीय जैसलमेर की पेयजल व्यवस्था मुख्य रूप से इंदिरा गांधी नहर परियोजना और उससे जुड़े जल वितरण तंत्र पर निर्भर है। शहर की बढ़ती आबादी, पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती मांग के बीच मौजूदा जलापूर्ति ढांचे पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। कई स्थानों पर पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं, जिनमें रिसाव और तकनीकी खराबियों की समस्या बनी रहती है। इसका असर शहर और गांवों में जलापूर्ति पर पड़ता है। 196 करोड़ रुपए की इस परियोजना का उद्देश्य मोहनगढ़ स्थित बाड़मेर लिफ्ट परियोजना से गजरूप सागर तक नई और अधिक क्षमता वाली पाइपलाइन बिछाकर पेयजल आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाना है। करीब 58 किलोमीटर लंबी इस लाइन के माध्यम से पानी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाया जाना प्रस्तावित है।

गजरूप सागर तक बिछेगी लाइन

- जैसलमेर शहर की पेयजल आपूर्ति में गजरूप सागर की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां तक पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचने से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जल वितरण बेहतर हो सकेगा।

- साथ ही जिले के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है। जलदाय विभाग के जानकारों के अनुसार यह परियोजना वर्ष 2041 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

- जैसलमेर जैसे मरुस्थलीय जिले में गर्मी के मौसम में पेयजल की मांग चरम पर पहुंच जाती है। कई बार तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने पर जलापूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनता है। ऐसे में यदि कहीं पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो जाए या तकनीकी समस्या आ जाए तो उसका असर व्यापक क्षेत्र पर पड़ता है।

- नई पाइपलाइन को इसी चुनौती का दीर्घकालिक समाधान माना जा रहा है। इसके बावजूद परियोजना के क्रियान्वयन में दिखाई दे रही धीमी गति लोगों की चिंता बढ़ा रही है।

पानी सबसे जरूरी

मरुस्थल में विकास की हर कहानी पानी से शुरू होकर पानी पर ही टिकती है। ऐसे में 196 करोड़ रुपए की यह परियोजना केवल एक पाइपलाइन नहीं, बल्कि जैसलमेर शहर और सैकड़ों गांवों के जल भविष्य को सुरक्षित करने की महत्वपूर्ण कड़ी है। अब लोगों को इंतजार है कि बजट घोषणा से आगे बढ़कर यह योजना कब धरातल पर उतरती है और वर्षों पुरानी जलापूर्ति समस्याओं का स्थायी समाधान बनती है।

डीपीआर के लिए भिजवाया प्रस्ताव

मोहनगढ़ से गजरूप सागर तक नई पाइप लाइन बिछाने के लिए मुख्यालय से जो भी दिशा निर्देश मिलते हैं, उसकी पालना की जा रही है। इस बड़े कार्य की डीपीआर बनाने का प्रस्ताव भिजवाया गया है। यह डीपीआर बाहरी एजेंसी से करवाने का प्रस्ताव है। जल्द ही इस दिशा में ठोस प्रगति होने की उम्मीद है।

- निरंजन मीणा, अधिशासी अभियंता, नगरखंड, जलदाय, जैसलमेर