सरहदी जिले में आखातीज यानी अक्षय तृतीया इस बार विवाहों का हाई-इम्पैक्ट सीजन लेकर आई है। अबूझ सावे के कारण 19 और खासकर 20 अप्रेल को 600 से अधिक जोड़े विवाह बंधन में बंधेंगे। बिना मुहूर्त के शुभ माने जाने वाले इस दिन का ग्रामीण अंचलों में गहरा सांस्कृतिक आधार है, जिसके चलते हर साल इस तिथि पर शादियों का ग्राफ अचानक उछाल लेता है।
सरहदी जिले में आखातीज यानी अक्षय तृतीया इस बार विवाहों का हाई-इम्पैक्ट सीजन लेकर आई है। अबूझ सावे के कारण 19 और खासकर 20 अप्रेल को 600 से अधिक जोड़े विवाह बंधन में बंधेंगे। बिना मुहूर्त के शुभ माने जाने वाले इस दिन का ग्रामीण अंचलों में गहरा सांस्कृतिक आधार है, जिसके चलते हर साल इस तिथि पर शादियों का ग्राफ अचानक उछाल लेता है। इस बार संख्या और तैयारियों का स्तर दोनों ही पिछले वर्षों से आगे नजर आ रहे हैं। गांवों में ढोल-नगाड़ों, बारातों और पारंपरिक रस्मों का रंग चढ़ चुका है तो शहर में बाजार पूरी तरह वेडिंग मोड में है। कपड़ा, आभूषण, रेडीमेड, कॉस्मेटिक्स, सजावट सामग्री और गिफ्ट सेगमेंट में खरीदारों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। व्यापारिक अनुमानों के अनुसार इस सीजन में 30 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार संभव है। खुदरा दुकानों के साथ थोक बाजार में भी मांग तेज हुई है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव साफ दिख रहा है। सेवा सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव हलवाई, टेंट हाउस, डीजे, बैंड और आरओ पानी सप्लाई पर है। कई ऑपरेटर्स की बुकिंग हफ्तों पहले फुल हो चुकी है। स्थानीय हलवाई सभी ऑर्डर कवर नहीं कर पा रहे, इसलिए बाहरी कारीगरों की एंट्री बढ़ी है। टेंट और फर्नीचर की सीमित उपलब्धता के कारण आयोजकों को विकल्प बदलने पड़ रहे हैं। शहर से लेकर गांवों तक विवाह स्थलों और भवनों की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, जिससे किराए में भी तेजी आई है। इन सबके बीच सरहदी जिले में इन दिनों शादियों की चमक से जगमगा रहा है, जहां हर मोहल्ला और हर गांव उत्सव का मंच बन गया है।
-आखातीज के बाद भी यह रफ्तार थमने वाली नहीं है। लगातार आयोजनों ने परिवहन, केटरिंग, साउंड, डेकोर और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कामों को भी गति दी है।
-रोजगार के अस्थायी अवसरों में वृद्धि हुई है, खासकर ग्रामीण युवाओं को काम मिला है।
-सीजन की खासियत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आधुनिक प्रस्तुतिकरण का मिश्रण है।
-एक ओर फेरे, मंडप और लोकगीत अपनी पहचान बनाए हुए हैं, तो दूसरी ओर लाइटिंग, थीम डेकोर, डीजे प्लेलिस्ट और क्यूरेटेड मेन्यू जैसे ट्रेंड तेजी से अपनाए जा रहे हैं। -डिजिटल निमंत्रण, ऑनलाइन बुकिंग और त्वरित भुगतान ने आयोजन को अधिक सुव्यवस्थित बनाया है।
-19-20 अप्रेल को 500 से अधिक विवाह संभावित
-30 करोड़ के पार कारोबार होने का अनुमान
-हलवाई, टेंट, डीजे, आरओ सेवाओं की मांग चरम पर
-सरहदी जिले में अबूझ सावे पर बिना मुहूर्त विवाह की परंपरा
-बाजारों में वेडिंग शॉपिंग का उछाल, बाहरी कारीगरों की मांग में वृद्धि
इवेंट सेवाओं के विशेषज्ञ मुकेश कुमार गोपा का कहना है कि आखातीज का विवाह सीजन जैसलमेर के लिए उच्च मांग का क्लस्टर तैयार करता है। इस अवधि में उपभोग तेजी से बढ़ता है, जिससे रिटेल और सर्विस सेक्टर में नकदी प्रवाह मजबूत होता है। छोटे दुकानदारों से लेकर इवेंट सेवाओं तक, हर स्तर पर आय के अवसर बनते हैं। यदि इस सीजन के लिए पूर्व-योजना, अस्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्किल्ड वर्कफोर्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तो आर्थिक लाभ और अधिक बढ़ सकता है, साथ ही उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं।