जैसलमेर

प्रोजेक्ट गोडावण में बड़ी सफलता, गूंजी दो नए चूजों की किलकारी

राजस्थान के राज्य पक्षी और दुनिया के सबसे लुप्तप्राय पक्षियों में शुमार गोडावण के संरक्षण की दिशा में दो कदम और बढ़ाए गए हैं। जैसलमेर जिले में प्रोजेक्ट जीआइबी के तहत संचालित गोडावण ब्रीडिंग सेंटरों में दो नए चूजों ने जन्म लिया है। इसके साथ जिले में संचालित सम व सुदासरी स्थित सेंटरों में गोडावणों की कुल संख्या 70 तक पहुंच गई है।
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Mar 13, 2026
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राजस्थान के राज्य पक्षी और दुनिया के सबसे लुप्तप्राय पक्षियों में शुमार गोडावण के संरक्षण की दिशा में दो कदम और बढ़ाए गए हैं। जैसलमेर जिले में प्रोजेक्ट जीआइबी के तहत संचालित गोडावण ब्रीडिंग सेंटरों में दो नए चूजों ने जन्म लिया है। इसके साथ जिले में संचालित सम व सुदासरी स्थित सेंटरों में गोडावणों की कुल संख्या 70 तक पहुंच गई है। प्रोजेक्ट गोडावण ने अपने चौथे वर्ष में प्रवेश करते ही यह बड़ी सफलता हासिल की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की पीठ थपथपाई है। उन्होंने एक्स पर लिखे संदेश में इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्यावरण-संवेदनशील नेतृत्व की जीत बताया है। इस बार की सफलता इसलिए खास है क्योंकि इन दो चूजों में से एक का जन्म प्राकृतिक मिलाप से हुआ है, जबकि दूसरे का जन्म आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन तकनीक के जरिए हुआ है।

वैज्ञानिकता का सुखद परिणाम

गोडावण जैसे शर्मीले और कम प्रजनन दर वाले पक्षी के लिए आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन का सफल होना वैज्ञानिकी का चमत्मकार माना जाता है। यह तकनीक उन पक्षियों के लिए वरदान साबित होगी जो प्राकृतिक रूप से प्रजनन नहीं कर पा रहे हैं। जानकारी के अनुसार इस साल का सबसे बड़ा कदम इन पक्षियों की सॉफ्ट रिलीज होगा। पिछले चार वर्षों से प्रजनन केंद्र में पाले जा रहे कुछ चुनिंदा चूजों को इसके तहत अब खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। सॉफ्ट रिलीज के तहत पक्षियों को अचानक खुले जंगल में छोडऩे के बजाय पहले एक बड़े बाड़े में रखा जाता है जहां वे प्राकृतिक माहौल के अभ्यस्त होते हैं। इसके बाद उन्हें पूरी तरह स्वतंत्र किया जाता है। कैप्टिव-ब्रीड पक्षियों का खुले जंगल में खुद को ढालना और शिकारियों से बचना इस प्रोजेक्ट का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण होगा।

विलुप्ति की कगार से वापसी

एक समय था जब दुनिया भर में गोडावणों की संख्या 150 से भी कम रह गई थी, जिनमें से अधिकांश राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क में थे। राजस्थान वन विभाग ने वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इनके अंडों को प्राकृतिक आवास से सुरक्षित उठाकर उन्हें इनक्यूबेटर में विकसित किया और आज यह संख्या 70 तक पहुंच गई है। राजस्थान दुनिया का इकलौता ऐसा राज्य है जहां गोडावण का सफल एक्स-सिटू संरक्षण किया जा रहा है। जैसलमेर का ब्रीडिंग सेंटर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध का केंद्र बन गया है।

Updated on:
13 Mar 2026 08:47 pm
Published on:
13 Mar 2026 08:47 pm