जैसलमेर

Jaisalmer: रेल पटरियां बनीं मौत का जाल, सालभर में दर्जनों पशुओं की दर्दनाक मौतें

वर्ष 2025 और 2026 के दौरान इस रेलखंड पर दर्जनों पशु और वन्यजीव जान गंवा चुके हैं। लगातार हो रहे हादसों से वन्यजीव प्रेमियों, ग्रामीणों और पशुपालकों में गहरी चिंता और रोष है।
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Jul 08, 2026
jaisalmer photo
रेल की पटरी पर काल का ग्रास बन रहे मूक पशु

लाठी. पशु एवं वन्यजीव बाहुल्य लाठी क्षेत्र से गुजर रही रेलवे लाइन अब राज्य पशु ऊंट, गोवंश सहित अन्य मवेशियों के लिए मौत का कारण बनती जा रही है। ओढाणिया से सोढाकोर तक रेलवे ट्रैक पर आए दिन ट्रेन की चपेट में आने से ऊंट, गाय, बकरियां, भेड़ें और दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों की मौत हो रही है। वर्ष 2025 और 2026 के दौरान इस रेलखंड पर दर्जनों पशु और वन्यजीव जान गंवा चुके हैं। लगातार हो रहे हादसों से वन्यजीव प्रेमियों, ग्रामीणों और पशुपालकों में गहरी चिंता और रोष है।

दो वर्षों में लगातार हुए हादसे

-3 जुलाई 2026 को धोलिया-लाठी के बीच पांच गोवंश की मौत हुई।

-23 मई 2026 को सांवला गांव के पास तीन ऊंट ट्रेन की चपेट में आ गए।

-1 अप्रेल 2026 को लाठी-सोढाकोर के बीच तीन गोवंश की मौत तथा तीन घायल हुए।

- 16 मार्च 2026 को लाठी रेलवे स्टेशन के पास छह ऊंटों की मौत हुई।

-11 फरवरी 2026 को धोलिया के पास दुर्लभ प्रजाति के चार गिद्ध मारे गए।

-18 जनवरी 2026 को धोलिया के पास दो गोवंश की मौत हुई।

- 31 दिसंबर 2025 को धोलिया के पास तीन गोवंश मारे गए।

- 16 दिसंबर 2025 को सांवला गांव के पास 12 भेड़ों की मौत तथा तीन घायल हुईं।

-2 दिसंबर 2025 को धोलिया के पास दो दुर्लभ गिद्धों की मौत हुई।

- 23 जुलाई 2025 को धोलिया के पास एक गोवंश की मौत और एक घायल हुआ।

- 30 मई 2025 को सोढाकोर के पास तीन गोवंश मारे गए।

-28 मई 2025 को लाठी रेलवे स्टेशन के पास तीन गोवंश की मौत हुई।

-27 मई 2025 को सोढाकोर के पास 22 बकरियां ट्रेन की चपेट में आ गईं।

-24 जनवरी 2025 को लाठी के पास एक ऊंटनी और उसके बछड़े की मौत हुई।

सुरक्षा इंतजामों का अभाव बना बड़ी वजह

लाठी क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण पशुपालन पर निर्भर हैं। रेलवे ट्रैक के आसपास जंगलों में घास और चारे की उपलब्धता के कारण मवेशी चरने पहुंच जाते हैं। ट्रेन आने पर घबराहट में कई पशु पटरी पार करते समय उसकी चपेट में आ जाते हैं। लगातार हादसों के बावजूद संवेदनशील स्थानों पर प्रभावी फेंसिंग, सुरक्षित क्रॉसिंग और अन्य सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं।

एकतरफा तारबंदी भी बन रही खतरा

लाठी और धोलिया के बीच करीब तीन किलोमीटर तक एक तरफ लगाई गई तारबंदी भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पा रही है। कई बार पशु तारबंदी में फंस जाते हैं और बाहर नहीं निकल पाने के कारण ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर प्रभावी सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।

बढ़ रहा है रोष

रेल की चपेट में आने से आए दिन हादसे हो रहे है। जिससे वन्यजीवप्रेमियों, ग्रामीणों व पशुपालकों में रोष है। कई बार जिम्मेदारों को अवगत भी करवाया है, लेकिन सुरक्षा के प्रबंध नहीं किए जा रहे है।

- गौरीशंकर पूनिया, तहसील संयोजक अखिल भारतीय विश्नोई सभा, पोकरण

जिम्मेदारों की ओर से पशुओं कि सुरक्षा को लेकर लाठी व धोलिया गांव के बीच तीन किलोमीटर कि लंबी एकतरफा जाली कि थी। लेकिन यह तारबंदी सुरक्षा कि बजाय पशुओं कि मौत का कारण बन रही है।इसमें फंसकर पशु ट्रेनों कि चपेट में आ रहे हैं।विभाग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।

-रणवीरसिंह भाटी, गोरक्षक

Updated on:
08 Jul 2026 08:38 pm
Published on:
08 Jul 2026 08:37 pm