जैसलमेर

Jaisalmer: अमृतम् जलम् : तगारियों में भरी रेत, संकल्प के साथ उठे हाथ…बही श्रम की बूंदें

राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् अभियान से प्रेरित होकर रविवार को रामदेवरा की नई नाड़ी पर ग्रामीणों ने श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया। करीब दो घंटे तक चले सामूहिक श्रम से नाड़ी के पायतन से रेत निकालकर उसकी जलधारण क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया गया। जनसहयोग और ग्राम पंचायत की पहल से पारंपरिक जलस्रोत को पुनर्जीवित करने की मुहिम को नई गति मिली।
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Updated: 28 Jun 2026, 9:01 PM IST
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रामदेवरा. अमृतम् जलम् अभियान के अंतर्गत नई नाड़ी पर श्रमदान करते जनप्रतिनिधि, पंचायत कार्मिक और बड़ी संख्या में ग्रामीण।

रामदेवरा. फावड़े, तगारियां और जल संरक्षण का संकल्प...। रविवार सुबह रामदेवरा की नई नाड़ी पर ऐसा ही प्रेरक दृश्य देखने को मिला। राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् अभियान से जुड़कर ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और पंचायत कार्मिक बड़ी संख्या में श्रमदान के लिए पहुंचे। करीब दो घंटे तक लगातार चले श्रमदान में नाड़ी के पायतन से रेत निकालकर पाल पर डाली गई।

सामूहिक प्रयास से जलस्रोत का स्वरूप निखरा और गांव में जल संरक्षण के प्रति नई जागरूकता का संदेश पहुंचा। नई नाड़ी कभी आसपास की ढाणियों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत रही है। वर्षों तक नियमित संरक्षण नहीं होने से पायतन में बड़ी मात्रा में रेत जमा हो गई, जिससे इसकी जलधारण क्षमता लगातार कम होती चली गई। अब ग्राम पंचायत के प्रयासों और जनसहयोग से इस पारंपरिक जलस्रोत को पुनर्जीवित करने की पहल तेज हो गई है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया

श्रमदान के दौरान ग्रामीणों ने उत्साह के साथ रेत निकालकर पाल को मजबूत बनाया, जिससे वर्षाजल संग्रहण की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। ग्राम पंचायत के प्रशासक सरपंच समंदरसिंह तंवर ने तगारी में रेत भरकर श्रमदान का शुभारंभ किया। इसके बाद ग्राम विकास अधिकारी एवं प्रशासक चौथाराम सोलंकी ने भी श्रमदान में सक्रिय भागीदारी निभाई। ग्रामीण महिलाओं और पुरुषों ने कंधे से कंधा मिलाकर श्रम किया और जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया। समंदरसिंह तंवर और चौथाराम सोलंकी ने कहा कि राजस्थान पत्रिका के अमृतम् जलम् तथा हरयाळो राजस्थान जैसे अभियान समाज को जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के प्रति प्रेरित कर रहे हैं।

पारंपरिक जलस्रोत पुनर्जीवन से वर्षाजल संचयन और पर्यावरण संरक्षण को मिली गति

उन्होंने प्रत्येक नागरिक से पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। ग्रामीण शंकरलाल ने कहा कि राजस्थान पत्रिका समाचारों के साथ सामाजिक सरोकारों को भी मजबूती से आगे बढ़ा रही है। ऐसे अभियान समाज को सकारात्मक दिशा देने के साथ लोगों को अपने जलस्रोतों और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में ग्राम विकास अधिकारी चौथाराम सोलंकी, वरिष्ठ सहायक पुखराज जयपाल, शंकराराम, जैनत खातून, रुक्मणी, आशाराम, सीताराम, लक्ष्मण, नखताराम, गोविंद, गीता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अंत में राजेंद्र सोनी ने अमृतम् जलम् अभियान की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए सभी सहभागी नागरिकों का आभार व्यक्त किया।

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28 Jun 2026, 9:01 PM IST
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