जैसलमेर

बच्चों की प्रतिभा को पहचानें और उनका समर्थन करें: इशान्या

सीमावर्ती जैसलमेर से बाहर निकलकर मायानगरी मुम्बई और दक्षिण भारतीय फिल्मोद्योम में अपनी पहचान कायम करने वाली इशान्या माहेश्वरी लम्बे अर्से बाद अपने परिवारजनों माता व बहन के साथ जैसलमेर आई हैं।

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Mar 28, 2026

सीमावर्ती जैसलमेर से बाहर निकलकर मायानगरी मुम्बई और दक्षिण भारतीय फिल्मोद्योम में अपनी पहचान कायम करने वाली इशान्या माहेश्वरी लम्बे अर्से बाद अपने परिवारजनों माता व बहन के साथ जैसलमेर आई हैं। जैसलमेर में स्कूलिंग करने के बाद इशान्या ने मुम्बई में चित्रकला और स्केचिंग की पढ़ाई की और धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर इन्फ्लूएंसर और मॉडलिंग के रास्ते फिल्मी दुनिया में दस्तक दी। उन्होंने अब तक तमिल और तेलुगु की फिल्मों में काम किया है। इशान्या के साथ राजस्थान पत्रिका ने विशेष बातचीत की। पेश है, बातचीत के मुख्य अंश -

पत्रिका : अपनी अब तक की यात्रा के बारे में बताएं।

इशान्या : जैसलमेर से स्कूलिंग करने के बाद मुम्बई में कला विषय की पढ़ाई की। लॉकडाउन के समय सोशल मीडिया पर सक्रिय रही। कई शॉर्ट वीडियो बनाए। फेसबुक के जरिए दक्षिण भारतीय फिल्मों में अभिनय का अवसर मिला। तमिलभाषी रॉकी और तेलुगु फिल्म राजा साहब का कमरा नाम फिल्मों में काम किया।

पत्रिका : बॉलीवुड में भी काम करने का अवसर मिला?

इशान्या : एक फिल्म में काम किया। जिसकी पूरी शूटिंग ग्रीस में हुई। इस फिल्म में संजय मिश्रा ने मेरे पिता की भूमिका निभाई। उनके साथ विजयराज और जॉनी लीवर जैसे मंझे हुए कलाकार भी फिल्म में थे। कोरोना लॉकडाउन के कारण यह फिल्म प्रदर्शित नहीं हो सकी।

पत्रिका : आज की युवा पीढ़ी को क्या कहना चाहेंगी?

इशान्या : आज के युवाओं से ज्यादा मैं उनके माता-पिता से कहना चाहूंगी कि, वे अपने बच्चों के हुनर को पहचानें और उनका समर्थन करें। आज की दुनिया क्रिएटिव वल्र्ड बन चुकी है। बच्चों का रुझान जिस क्षेत्र में है, उसमें उन्हें आगे बढ़ाएं। मैं खुशकिस्मत हूं कि, मुझे मेरी माता, बहन और मामा (सुशील व्यास) का बहुत सहयोग मिला। माहेश्वरी समाज के बहुत लोग फिल्म व मॉडङ्क्षलग लाइन में नहीं हैं, लेकिन परिवार के सपोर्ट से मुझे आगे बढऩे में भरपूर सहायता मिली और आज मैं अपने काम को बहुत इंजॉय कर रही हूं।

पत्रिका : बड़े शहरों में नशे का चलन बहुत बढ़ गया है, क्या कहना चाहेंगी?

इशान्या : मैं किसी भी प्रकार के नशे के पूरी तरह से खिलाफ हूं। असली नशा तो अपने लक्ष्य के पीछे जुनून दिखाने में है। जो भी काम करें, उसे पूरी शिद्दत से किया जाना चाहिए।

पत्रिका : जैसलमेर आकर कैसा महसूस करती हैं?

इशान्या : जैसलमेर आना हमेशा ही अच्छा लगता है। यहां की कई यादें हैं। यहां सर्दियों में घूमना खासतौर पर अच्छा लगता है। विशेषकर यहां का खान-पान बहुत आकर्षित करता है।

Updated on:
28 Mar 2026 09:13 pm
Published on:
28 Mar 2026 09:12 pm
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