
सीमांत जैसलमेर जिले में नया साल लगते ही सर्दी के मौसम में मानो बर्फीलेपन का तडक़ा लग गया है। न्यूनतम तापमान लगातार 5 डिग्री और उसके आसपास बना हुआ है। सुबह देर तक कोहरे की चादर में पूरा जिला समाया रहता है और दृश्यता नाम मात्र की रह जाती है। ठिठुराने और हाड़ कम्पाने वाली इस सर्दी में अब सबसे ज्यादा तकलीफ उन नौनिहालों को होने वाली है, जिनके स्कूल शीतकालीन अवकाश के बाद अब खुलना शुरू हो गए हैं। राज्य सरकार की ओर से 6 जनवरी से स्कूल खोले जाने हैं, वहीं जैसलमेर में अंग्रेजी माध्यम के कुछ स्कूल गुरुवार से शुरू हो गए तो कुछ शुक्रवार से खुल जाएंगे। इसके बाद शनिवार से तो सरकारी-निजी, हिंदी-अंग्रेजी दोनों माध्यमों के स्कूल शुरू किए जाने ही हैं। ऐसे में बच्चों को गलाने वाली सर्दी में अलसुबह उठ कर तैयार होने के बाद स्कूल की राह पकडऩी होगी। उनके सर्दी जनित बीमारियों कीे चपेट में आने की आशंका के चलते अभिभावकों में खासी चिंता का वातावरण है। अभी तक राज्य सरकार की तरफ से प्रदेश भर में चल रही शीतलहर और शीत-दिवसों के मद्देनजर सर्दी की छुट्टियों में बढ़ोतरी का आदेश जारी नहीं हुआ है। जबकि केंद्र सरकार की ओर से संचालित केंद्रीय विद्यालयों में 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश पूर्व से घोषित हैं। उनमें पढऩे वाले बच्चे और उनके अभिभावकों के अलावा अन्य सभी चिंता के दौर से गुजर रहे हैं। अब तक का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री
रेगिस्तानी जैसलमेर जिला इन दिनों राजस्थान के उन चुनिंदा 5 से 10 जिलों की फेहरिस्त में शामिल है, जहां न्यूनतम तापमान सबसे कम चल रहा है। यह स्थिति नए वर्ष की शुरुआत से ही बन गई है। यहां तक कि पड़ोसी बाड़मेर और जोधपुर जिलों में भी जैसलमेर के मुकाबले सर्दी के तेवर काफी कम बने हुए हैं। मरुस्थलीय जैसलमेर में गुरुवार का दिन इस सर्दी के सीजन का सबसे ठंडा दिन रहा। न्यूनतम तापमान गोता लगाते हुए 5 डिग्री तक लुढक़ गया। वहीं अधिकतम तापमान भी महज 16.4 डिग्री तक ही बढ़ पाया। ऐसे में रात और दिन एक जैसे हालात बन गए हैं। गुरुवार को दिन की शुरुआत भारी कोहरे के बीच हुई। अब तक की सबसे लम्बी अवधि ेका कोहरा आसमान में छाया रहा और सुबह 11 बजे के बाद ही सूरज की किरणें जैसाण की धरती पर उतरी। लोगों को धूप खिलने के बावजूद भी सर्दी से ज्यादा राहत नहीं मिल सकी क्योंकि इस दौरान बर्फ जैसी ठंडी हवाओं का दौर लगातार जारी था। जैसलमेर भ्रमण पर आए सैलानियों को यहां इतनी अधिक सर्दी की उम्मीद नहीं है लिहाजा वे मौसम के इस बिगड़े मिजाज से खासे परेशान दिखाई दिए। कई गरम इलाकों के लोग तो ज्यादा ऊनी कपड़ों के बिना ही यहां आए हुए हैं, उनका होटलों के कमरों से बाहर निकलना मुहाल हो गया है। जो पर्यटक गुरुवार को घूमने निकले, वे सिर से पांव तक गरम कपड़ों के लिहाफ में ढंके दुबके नजर आए। सैलानी भी अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर खास तौर पर चिंतित दिखाई दिए। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने जैसलमेर में ऊनी कपड़े खरीदे हैं ताकि यहां बुखार-जुकाम जैसी बीमारियों से बचा जा सके।