जैसलमेर

Jaisalmer: स्मार्ट भू-प्रबंधन मॉडल से रुकेगा अतिक्रमण, मिलेगी संतुलित शहरी विकास की नई दिशा

स्वर्णनगरी के तेजी से बदलते भू-दृश्य के बीच अब भूमि प्रबंधन को हाईटेक बनाने की जरूरत महसूस होने लगी है। ड्रोन सर्वे, जीआईएस मैपिंग और डिजिटल रिकॉर्ड से अतिक्रमण, विवाद और अनियोजित विस्तार पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित नियोजन ही भविष्य के जैसलमेर को संतुलित विकास की दिशा देगा।
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Aug 03, 2026
jaisalmer news photo
स्मार्ट प्लानिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और नियोजित विकास से बदलेगी स्वर्णनगरी की तस्वीर।

जैसलमेर. स्वर्णनगरी अब केवल पर्यटन की पहचान नहीं रही। रक्षा गतिविधियों, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, सीमावर्ती आधारभूत ढांचे और लगातार बढ़ते पर्यटन निवेश ने शहर के भू-उपयोग का स्वरूप तेजी से बदल दिया है। ऐसे में भूमि प्रबंधन को पारंपरिक कागजी व्यवस्था से निकालकर ड्रोन सर्वे, जीआईएस आधारित मैपिंग और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक आधारित निगरानी और वैज्ञानिक शहरी नियोजन अपनाने पर ही आने वाले वर्षों में जैसलमेर का विकास संतुलित और पारदर्शी रह सकेगा। तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के साथ सबसे बड़ी चुनौती अनियोजित निर्माण, अतिक्रमण और भूमि विवादों की है। वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में सीमांकन, रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर सामने आता है। ड्रोन सर्वे और जीआईएस मैपिंग से प्रत्येक भूखंड का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने पर ऐसे विवाद काफी हद तक कम हो सकते हैं। साथ ही सरकारी भूमि की वास्तविक समय में निगरानी भी संभव होगी।विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक भू-प्रबंधन प्रणाली केवल रिकॉर्ड डिजिटल करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे शहर का डिजिटल ट्विन तैयार करती है। इससे विकास योजनाएं वास्तविक आंकड़ों पर आधारित बनती हैं।

वर्तमान मॉडल को बदलना जरूरी

जैसलमेर में पर्यटन, सौर और पवन ऊर्जा, सीमा सुरक्षा तथा आधारभूत परियोजनाओं के विस्तार ने भूमि की मांग लगातार बढ़ाई है। इसके साथ शहरी आबादी का फैलाव भी तेजी से हो रहा है। यदि यह विस्तार बिना नियोजन जारी रहा तो भविष्य में सड़क, सीवरेज, जलापूर्ति और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

ये हैं मुख्य चुनौतियां

-तेजी से बदलता भूमि उपयोग

-अनियोजित कॉलोनियों का विस्तार

-सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण

-सीमांकन और रिकॉर्ड संबंधी विवाद

-भविष्य की आधारभूत सुविधाओं के लिए -भूमि आरक्षित रखने की आवश्यकता

तकनीकी समाधान

-ड्रोन आधारित उच्च-रिजॉल्यूशन सर्वे

-जीआइएस प्लेटफॉर्म पर प्रत्येक भूखंड की मैपिंग

-ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड का एकीकरण

-उपग्रह चित्रों से अतिक्रमण की नियमित निगरानी

-विभागों के बीच साझा डिजिटल डाटा प्लेटफॉर्म

किफायती आवास बनेगा स्थायी समाधान

विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है। यदि निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए नियोजित किफायती आवास उपलब्ध नहीं होंगे तो नई अनियमित बस्तियां विकसित होती रहेंगी। इसलिए पुनर्वास नीति, सस्ती आवासीय योजनाएं और आधारभूत सुविधाओं से युक्त नियोजित कॉलोनियां दीर्घकालिक समाधान बन सकती हैं।

पर्यटन और निवेश भी चाहते हैं व्यवस्थित शहर

जैसलमेर हर वर्ष लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है। दूसरी ओर सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ रहा है। सुव्यवस्थित सड़क नेटवर्क, हरित क्षेत्र, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल भूमि प्रबंधन निवेशकों का भरोसा भी मजबूत करते हैं। आधुनिक शहरों में भूमि प्रबंधन को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

एक्सपर्ट व्यू:... तो बनेगा दशकों तक संतुलित विकास का मॉडल

जैसलमेर जैसे संवेदनशील सीमावर्ती और पर्यटन आधारित शहरों में विकास का प्रत्येक निर्णय डेटा आधारित होना चाहिए। डिजिटल भूमि रिकॉर्ड, जीआइएस विश्लेषण और ड्रोन मॉनिटरिंग को मास्टर प्लान से जोड़ने पर अवैध विस्तार रोका जा सकता है। यदि इसके साथ किफायती आवास, हरित क्षेत्र और सार्वजनिक परिवहन की समानांतर योजना बनाई जाए तो शहर आने वाले दशकों तक संतुलित विकास का मॉडल बन सकता है।

- नीरज सक्सेना, शहरी विकास विश्लेषक

Updated on:
03 Aug 2026 08:48 pm
Published on:
03 Aug 2026 08:48 pm