जैसलमेर

वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण आज, लेकिन भारत में रिंग ऑफ फायर नहीं आएगा नजर

17 फरवरी को चालू वर्ष- 2026 की का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। इसके तहत सूर्य एक आग के गोले जैसा दिखेगा, जिसे खगोलीय भाषा में रिंग ऑफ फायर कहा जाता है।

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Feb 16, 2026

17 फरवरी को चालू वर्ष- 2026 की का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। इसके तहत सूर्य एक आग के गोले जैसा दिखेगा, जिसे खगोलीय भाषा में रिंग ऑफ फायर कहा जाता है। चूंकि यह बड़ी खगोलीय घटना भारत में नहीं दिखेगी इसलिए देश में इस कार्मिक सूतक भी मान्य नहीं होगा।

हालांकि आगामी 3 मार्च को धुलंडी के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। जैसलमेर के युवा ज्योतिषाचार्य उमेश आचार्य ने बताया कि मंगलवार को सूर्य ग्रहण की घटना चूंकि भारत में दिखाई नहीं देगी इसलिए इसका सूतक नहीं लगेगा। उन्होंने बताया कि सूर्य ग्रहण के एक पखवाड़े बाद यानी 3 मार्च को चंद्र ग्रहण इस बार धुलंडी को होगा और यह भारत में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। ऐसे में इसका सूतक काल भी मान्य होगा।

क्यों होता है सूर्य ग्रहण

विज्ञान के अनुसार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। 17 फरवरी को होने वाले वलयाकार ग्रहण में चंद्रमा का आभासी आकार सूर्य से छोटा होगा। इस कारण वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा। उस समय सूर्य का बाहरी किनारा एक चमकती हुई अंगूठी या आग के घेरे की तरह दिखाई देगा। इसी कारण इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। इस सूर्य ग्रहण की अवधि 17 फरवरी को अपराह्न 3.26 बजे से सायं 7.57 बजे तक रहेगी। यह अंटार्कटिका, अर्जेंटीना, चिली और दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से में नजर आएगा। यह ग्रहण कुम्भ राशि और घनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है।

ज्योतिष और संस्कृति में ग्रहण

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को ऊर्जा परिवर्तन का एक बड़ा कारक माना जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में ग्रहों की बदलती स्थिति मानव मन, प्रकृति और सामाजिक घटनाओं पर गहरा असर छोड़ती है। ज्योतिषाचार्य उमेश आचार्य के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं। भगवान की प्रतिमाओं को छूने की मनाही होती है और कोई भी नया या शुभ कार्य किया जाना वर्जित होता है।

Published on:
16 Feb 2026 08:16 pm
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