सीमावर्ती जैसलमेर जिला पूरी तरह से जाड़े की जकडऩ में आया हुआ है। बीते दिनों से जारी सर्दी का सितम कम होने की बजाए बढ़ रहा है।
सीमावर्ती जैसलमेर जिला पूरी तरह से जाड़े की जकडऩ में आया हुआ है। बीते दिनों से जारी सर्दी का सितम कम होने की बजाए बढ़ रहा है। गत शनिवार की रात को जैसलमेर का न्यूनतम पारा इस सीजन के न्यूनतम स्तर 3.1 डिग्री तक लुढक़ गया। दूसरी ओर चांधन, मोहनगढ़ और रामगढ़ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में रात का पारा जमाव बिंदु पर चला गया और रविवार सुबह इन क्षेत्रों में चार पहिया वाहनों की छतों व दुपहिया की सीटों पर बर्फ की परत जमी हुई नजर आई।
शहर व गांवों में सुबह कोहरे की घनी चादर छाई हुई थी। जो करीब 9 बजे के बाद धूप निकलने से छंटी लेकिन बर्फानी हवाओं के बहने से पूरा सीमांत क्षेत्र धूजता रहा। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को दिन का अधिकतम तापमान 19.1 और न्यूनतम 3.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। यह लगातार चौथा अवसर था, जब जैसलमेर का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री से कम रहा है। लोगों को घरों में दुबके रहने को विवश होना पड़ रहा है। दूसरी ओर किसी कार्यवश घरों से बाहर निकले लोग पूरी तरह से गर्म कपड़ों के लबादों में ढंके हुए नजर आते हैं।
चांधन (जैसलमेर). क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार पड़ रही कड़ाके की सर्दी और बढ़ गया है। सर्द हवाओं और रात को पड़ रही अत्यधिक ठिठुरन के चलते तापमान जमाव बिंदु से नीचे पहुंच गया। परिणामस्वरूप चांधन क्षेत्र में कई जगह पानी जम गया। कृषि नलकूपों पर लगी पाइपों, चारा ढंकने वाली तिरपालों और खेतों में पड़ी नमी पर बर्फ की पतली परत नजर आई। कस्बे में खड़े वाहनों की सीटों पर भी नमी जमने की स्थिति देखी गई। मौसम के इस अचानक कड़े रुख से आम जनजीवन प्रभावित हुआ। सर्दी और कोहरे के कारण खेती व मजदूरी जैसे कार्यों की शुरुआत में देरी हो रही है। कस्बे और ग्रामीण अंचलों में सुबह-शाम अलाव की स्थिति आम हो चुकी है।
रामगढ़ (जैसलमेर). क्षेत्र में लगातार तीसरे दिन शीतलहर का असर बना हुआ है और पारा शून्य के आसपास पहुंच गया। कड़ाके की सर्दी के बीच रविवार सुबह मोटरसाइकिल की सीटों से लेकर चार पहिया वाहनों की छतों और शीशों पर बर्फ की परत जम गई। खुले स्थानों पर भी बर्फ की चादर दिखाई दी। रात के समय बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर सन्नाटा पसरा रहा। लोग अलाव और हीटर का सहारा लेते दिखाई दिए। रविवार सुबह से ही तेज और सर्द हवाओं ने हालात और कठोर कर दिए। न्यूनतम तापमान लगातार नीचे जा रहा है, जिससे शीतलहर का प्रभाव और गहरा हो गया।