जैसलमेर

jaisalmer: गणित पूरी तरह से भाजपा की, कांग्रेस भी बता रही जीत की तैयारी

जैसलमेर नगरपरिषद सभापति का चुनाव सोमवार को होगा, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। 45 सदस्यीय बोर्ड में भाजपा के 25 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के 16 पार्षदों के साथ एक निर्दलीय का समर्थन बताया जा रहा है। बहुमत के आंकड़ों में भाजपा आगे होने के बावजूद दोनों दलों ने पार्षदों की बाड़ाबंदी कर रखी है और भितरघात की आशंका बनी हुई है।
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Sep 19, 2026
jaisalmer
नगरपरिषद कार्यालय में करवाई जाएगी सभापति पद की वोटिंग।

जैसलमेर. जैसलमेर नगरपरिषद के मुखिया यानी सभापति का चुनाव सोमवार को है। प्रशासन और पुलिस की तरफ से शांतिपूर्वक ढंग से मतदान करवाने की तैयारियों के बीच असली मोर्चा सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच खुला हुआ है। भाजपा ने 45 सदस्यों वाले नगरपरिषद बोर्ड में 25 सीटों पर जीत हासिल कर रखी है और उसके अलावा पार्टी के खेमे में 3 निर्दलीयों की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है। इसके दूसरी तरफ कांग्रेस ने 16 सीटें जीती और एक निर्दलीय को मिला कर उसके पास 17 पार्षदों का समर्थन है। ऐसे में सामान्य गणित के हिसाब से भाजपा के सभापति प्रत्याशी विजय डांगरा पलड़ा साफ तौर पर भारी है। वह सामान्य बहुमत से 5 पार्षदों का अतिरिक्त बल रखते हैं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी कहीं न कहीं भितरघात या पार्षदों के बिखराव की आशंकाओं से घिरी हुई है। यही कारण है कि मतदान दिवस से उसने अपने उम्मीदवारों को अज्ञात स्थान पर रखा हुआ है। परिणाम आने के बाद जीते हुए पार्षदों की कड़ी बाड़ाबंदी जारी है। दूसरी ओर कांग्रेस है। जिसने पराजित प्रत्याशी निर्मल पुरोहित को सभापति पद का उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने भी अपने सभी जीते हुए पार्षदों को लगातार अज्ञातवास में ही रखा हुआ है।

पार्षदों को सीधे मतदान केंद्र लाने की तैयारी

आगामी 21 सितम्बर को नगरपरिषद कार्यालय स्थित सभा भवन में सभापति के चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण करवाई जाएगी। उसी दिन सुबह दोनों पार्टियां अपने-अपने पार्षदों को सीधे वोटिंग करवाने के लिए पहुंचाएंगी। मतदान के बाद भी पार्षदों को एक स्थान पर रखे जाने की जानकारी है।

चर्चा का एक ही मसला- कौन बनेगा सभापति

इधर पूरे शहर में राजनीतिक कार्यकर्ताओं ही नहीं आम लोगों के बीच भी चर्चा के केंद्र में एक ही सवाल छाया हुआ है कि सभापति का ताज किसके सिर पर सजेगा? चौक-चौराहों से लेकर ओटों व पाटों और चाय-पान की थडिय़ों से लेकर घर-घर में इसे लेकर दावों-प्रतिदावों का दौर चल रहा है। भाजपा का स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद स्थानीय निकाय में पार्षदों पर किसी तरह के व्हिप जैसी व्यवस्था नहीं होने के चलते अंतिम परिणाम आने तक यह सवाल गूंजता रहने वाला है। गत नगरपरिषद चुनाव में कांग्रेस से बागी हरिवल्लभ कल्ला के जीत दर्ज करने की यादें लोगों के जेहन में आज भी ताजा हैं।

Updated on:
19 Sept 2026 09:09 pm
Published on:
19 Sept 2026 09:09 pm