स्वर्णनगरी में पर्यटन के लिहाज से रात्रिकालीन भ्रमण स्थलों की कमी एक बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन अब यह चिंता इतिहास बन चुकी है।
स्वर्णनगरी में पर्यटन के लिहाज से रात्रिकालीन भ्रमण स्थलों की कमी एक बड़ी चिंता मानी जाती थी, लेकिन अब यह चिंता इतिहास बन चुकी है। लगभग 600 वर्ष पुराना ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर नाइट टूरिज्म का ऐसा सितारा बनकर उभरा है, जिसने शाम ढलते ही पूरे क्षेत्र को रोशनी, रौनक और जीवन से भर दिया है। दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह की शामें यहां किसी उत्सव से कम नहीं दिख रहीं। दिन ढलते ही गड़ीसर सरोवर के मार्ग, प्रवेश द्वार और आसपास के इलाके रोशनियों से जगमगा उठते हैं।
माकूल प्रकाश व्यवस्था के बीच सैकड़ों सैलानी यहां भ्रमण के साथ मनचाही फोटोग्राफी का आनंद लेते नजर आते हैं। रोजाना 2 हजार से अधिक पर्यटक रात के समय सरोवर क्षेत्र में पहुंच रहे हैं, वहीं पर्यटन सीजन के उफान पर होने से यह संख्या दो हजार तक पहुंच रही है। गड़ीसर सरोवर के बाएं भाग में होने वाला लाइट एंड साउंड शो नाइट टूरिज्म की पहचान बन गया है।तकनीकी गड़बड़ी के कारण कुछ समय तक बंद रहने के बाद अब यह शो फिर से सुचारू हो गया है, जिससे देशी के साथ विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी भी लगातार बढ़ रही है। ऐतिहासिक कथाओं का प्रस्तुतिकरण और रोशनी के संगम ने गड़ीसर की रातों को यादगार बना दिया है। रात के समय शांत जल में नौकायन करना सैलानियों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। ऐतिहासिक टीलों की प्रोल के भीतर से होते हुए नौकायन का अनुभव पर्यटकों के लिए रोमांच और सुकून का अनूठा मेल बन गया है। सरोवर की रोशनी पानी में प्रतिबिंबित होकर दृश्य को और भी मनोहारी बना देती है।
शाम से लेकर देर रात तक गड़ीसर क्षेत्र में बाजारों जैसी रौनक दिखाई देती है। खाने-पीने के ठेले, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, राजस्थानी परिधान और हस्तशिल्प की अस्थायी दुकानों पर पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। नगरपरिषद की ओर से लगाए गए विभिन्न फोटो प्वाइंट्स भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जहां हर सैलानी तस्वीरें खिंचवाना नहीं भूलता।