
देशी-विदेशी पर्यटकों के चहेते और स्वर्णनगरी के नाम से मशहूर जैसलमेर शहर में अब खुले में कचरा फेंकने वालों की खैर नहीं होगी। कचरा पात्रों के आसपास सहित प्रमुख स्थानों पर गंदगी फैलाने और नियमों की अनदेखी करने वालों पर निगरानी के लिए नगरपरिषद प्रशासन की ओर से व्यापक कदम उठाए जाने की तैयारी की गई है।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका में 8 फरवरी को सुनहरी नगरी के सौन्दर्य पर काला धब्बा.. शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था, जिसमें पिछले दिनों प्रमुखता से साफ-सफाई व्यवस्था के पटरी से उतरने की सि्थति को उजागर किया था। समाचार प्रकाशन के बाद नगरपरिषद प्रशासन हरकत में आया। आने वाले समय में शहर भर में 250 सीसीटीवी कैमरे लगाने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों, बाजार क्षेत्रों, कॉलोनियों और कचरा संग्रहण केंद्रों पर चरणबद्ध तरीके से कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों के जरिए खुले में कचरा फेंकने, नालियों में मलबा डालने और सार्वजनिक स्थानों को गंदा करने वालों की पहचान की जा सकेगी। इसके लिए एक केंद्रीय कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा, जहां 24 घंटे मॉनीटरिंग होगी। शहर के मुख्य मार्गों में सफाई व्यवस्था को लेकर गंभीरता दिखनी शुरू हो गई है।
शहर में साफ-सफाई व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए सुबह-शाम मोनेटरिंग की जा रही है। सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग के लिए निगरानी दल गठित किया गया है, जो सुबह और शाम दोनों समय सफाई कार्य का निरीक्षण कर रहा है। वार्ड स्तर पर जिम्मेदारी तय की गई है और संबंधित सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति व कार्य की नियमित समीक्षा की जा रही है। जहां भी कचरे के ढेर मिलेंगे, वहां संबंधित ठेकेदार और कर्मचारियों से जवाब तलब किया जाएगा।
नगरपरिषद के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सफाई व्यवस्था में बड़ी बाधा कई लोगों की लापरवाही के कारण भी आ रही है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था होने के बावजूद कई लोग रात के अंधेरे में या सुबह-सुबह खाली प्लॉटों और सडक़ों किनारे कचरा डाल देते हैं। इसके अलावा कचरा संग्रहण केंद्रों पर सफाई होने के बाद दुकानदार आदि कूड़ा-करकट खुले में डाल देते हैं। शहर में स्वच्छंद घूम रहे पशुओं की समस्या पर भी सख्ती शुरू कर दी गई है। नगरपरिषद की टीमों ने ऐसे पशुओं की धरपकड़ अभियान तेज कर दिया है। मुख्य बाजार, अस्पताल और प्रमुख चौराहों व मार्गों से पशुओं को पकडकऱ गोशालाओं में भेजा जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इससे यातायात बाधा और दुर्घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। नाले-नालियों के ओवरफ्लो होने का एक बड़ा कारण पोलीथिन व प्लास्टिक की बोतलों को माना जा रहा है। यह और बात है कि पॉलीथिन पर प्रदेश भर में वर्षों पहले पाबंदी लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद विभिन्न दुकानदारों, ठेले व रेहड़ी वालों की तरफ से इसका इस्तेमाल चल रहा है।
जैसलमेर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नगरपरिषद की तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इसके लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनभागीदारी भी जरूरी है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाने और निर्धारित समय पर कचरा वाहन को कचरा सौंपने की अपील की जाती है। आने वाले समय में कैमरे लगाए जाएंगे और सख्ती भी की जाएगी।
Published on:
23 Feb 2026 08:16 pm
बड़ी खबरें
View Allजैसलमेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
