
जैसलमेर. सोनार दुर्ग की रपटीली घाटियां बीते लम्बे अर्से से सैलानियों समेत दुर्गवासियों और अन्य नगरवासियों के लिए खतरे का सबब बनी हुई हैं। नगरपरिषद की ओर से पिछले अर्से के दौरान दुर्ग की पथरीली घाटियों की टंचाई का काम रस्मी तौर पर ही करवाया गया है। यही वजह है कि दुर्ग की घाटियां राहगीरों तथा दुपहिया वाहन चालकों के लिए मानो कड़ी परीक्षा बन गई हैं।
सीवरेज कार्य से बिगड़ गए हालात
दुर्ग में दो साल पूरे हुए सीवरेज लाइन बिछाने के कार्य की वजह से हालात और विकट हो गए। सीवरेज लाइन बिछाने के कार्य के चलते अखे प्रोल से हवा प्रोल तक पूरे दुर्ग की घाटी को उधेड़ कर रख दिया गया था। उन्हें पुन: दुरुस्त करने का कार्य चलताऊ अंदाज में पूरा करवाया गया। मनचाहे अंदाज में पत्थर जोडऩे की वजह से घाटियां बहुत उबड़-खाबड़ हो गईं। साथ ही उनकी चिकनाई को कम करने के लिए समुचित बंदोबस्त नहीं करने से स्थितियां लगभग अनियंत्रित-सी हो गई हैं। सीवरेज लाइन के कारण ही दुर्ग की घाटियों के बायें भाग में जो दाबडिय़ां लगाई गई हैं, वे भी लोगों विशेषकर देशी-विदेशी सैलानियों के लिए खतरे का सबब बन गई हैं। इन बड़ी-बड़ी दाबडिय़ों को खुरदरा बनाने की तरफ ध्यान नहीं दिया गया और न ही उनका लेवल समान किया गया। इससे कई बार सैलानी उस पर फिसल कर गिरते हैं तो कुछ मामलों में उनका पांव दाबडिय़ों के बीच के अंतराल में फंस जाता है।
रोजाना हजारों की आवाजाही
दुर्ग में करीब तीन हजार लोग निवास करते हैं। वे अपने नौकरी-व्यवसाय और दूसरे कार्यों के लिए दिन में औसतन तीन-चार दफा दुर्ग से उतरते-चढ़ते हैं। ऐसे ही यहां नगरआराध्य भगवान लक्ष्मीनाथ का मंदिर है। जिसके दर्शन करने रोजाना बड़ी संख्या में शहर भर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। सुबह के समय लक्ष्मीनाथ और जैन मंदिरों के साथ अन्य मंदिरों के दर्शनार्थी, स्कूली बच्चों तथा सैलानियों की आवाजाही बेहद बढ़ जाती है। ऐसे समय में दुर्ग की घाटियों पर फिसलकर गिरने के छोटे-बड़े हादसे भी घटित होते रहते हैं। पर्यटन सीजन उफान होने के चलते इन दिनों तिपहिया वाहनों की दिनभर आवाजाही बनी रहने से स्थितियां बद से बदतर हो रही हैं। नगरपरिषद की ओर से समय-समय पर घाटियों के पत्थरों की टंचाई का जो कार्य करवाया जाता है, वह केवल दिखावटी होकर रह गया है। ऐसे कार्य से लोगों को कोई राहत नहीं मिल पा रही।
04 प्रोलें हैं सोनार दुर्ग में
80 हजार है शहर की आबादी
04 नंबर वार्ड के रूप में जाना जाता है सोनार किला
400 औसत सैलानी पहुंचते है सोनार दुर्ग